राजनीति में हमेशा दो और दो चार नहीं होते। बीते कुछ सालों में ध्रुवीकरण के समांतर दूसरे वर्ग के ध्रुवीकरण ने सियासत में बड़ा बदलाव किया है। हालांकि, आंकड़ों के लिहाज से देखें तो कांग्रेस की अगुआई में बना महागठबंधन भाजपा के लिए बड़ी चुनौती पेश कर सकता है। मसलन जिन चार दलों के बीच महागठबंधन हुआ है उनका वोट शेयर बीते चुनाव में 49 फीसदी था। जबकि राजग को 41.5 फीसदी वोट मिले थे। बीते लोकसभा चुनाव में कांग्रेस-एआईयूडीएफ का संयुक्त वोट राजग के 36 फीसदी से सात फीसदी अधिक था।
भाजपा की चुनौती
- विपक्ष का महागठबंधन
- पार्टी में तीन अलग-अलग ताकतवर गुट के बीच वर्चस्व की लड़ाई
- पांच साल की सत्ता के कारण सत्ता विरोधी रुझान पाटने की चुनौती
ताकत
- पीएम की लोकप्रियता
- असम अस्मिता का सवाल
- राज्य में कराए गए विकास कार्य
विपक्ष की ताकत
- पहली बार महागठबंधन का अस्तित्व में आना
- एनआरसी पर फैला भ्रम
- मुस्लिम मतों के एकजुट होने की संभावना
कमजोरी
- कद्दावर चेहरे का अभाव
- महागठबंधन में एक चेहरे पर आमसहमति नहीं
- बदरुद्दीन अजमल की राजनीतिक महात्वाकांक्षा