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असम चुनाव: जापी, गमोसा और जोराई का क्या है महत्व, वोट बटोरने में कितने कामयाब?

Sun, 21 Mar 2021 04:15 PM IST
मुकेश कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी

सार

हर राज्य की अपनी सांस्कृतिक-सामाजिक और राजनीतिक पहचान होती है। ऐसे में एक नजर डालते हैं असम चुनाव में जापी (टोपी), गमोसा (गमछा) और जोराई (घंटी धातु) का क्या महत्व है?
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- - फोटो : social media
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विस्तार
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असम सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। हर राज्य की अपनी सांस्कृतिक-सामाजिक और राजनीतिक पहचान होती है, जिसे राजनेता चुनाव से ठीक पहले उसका इस्तेमाल कर उस राज्य में अपने राजनीतिक हित साधने में जुट जाते हैं। असम में इन दिनों वहीं हो रहा है। जो भी राजनेता वहां चुनावी सभाओं को संबोधित करने के लिए जाते हैं तो जैसे लगता है कि वो वहीं के हैं और वहीं के हो जाएंगे, क्योंकि यह राजनीतिक दलों के लिए एक ऐसा जरिया बन गया है, जिसे पार्टियां हर संभव भुनाने की कोशिश करती हैं और हद तक उसे इसका लाभ भी मिल जाता है। ऐसे में आइए हम आपको बताते हैं कि असम चुनाव में जापी (टोपी), गमोसा (गमछा) और जोराई (घंटी धातु) का क्या महत्व है?

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गमोसा (गमछा)

गमोसा असम की अस्मिता और संस्कृति की पहचान है। चुनाव से पहले रैलियों व सभाओं में भी इस गमोसा की बहार है। यह हाथ से बना लाल सफेद धारियों वाले बार्डर से बना गमछा होता है। इन दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियकां गांधी सभी इस गमछे में नजर आ रहे हैं। साल 1916-17 में यह गमछा असमिया राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में सामने आया। तब असम छात्र संमिलन और असमिया साहित्य सभा जैसे संगठन सामने आए थे। गमोसा के जरिए बड़े लोगों व मेहमानों का सम्मान किया जाता है। मगर समय समय पर इसके जरिए विरोध भी जताया जाता है। राजनीतिक दल इसे असमिया संसकृति का प्रतीक मानकर इसका उपयोग कर रहे हैं और इसके जरिए खुद को असम से जोड़ रहे हैं।

जापी (टोपी)

असम की शंकु के आकार की टोपी को जापी कहा जाता है। ऐतिहासिक रूप से जापी को किसानों द्वारा खेतों में धूप से बचाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। आज रंग-बिरंगी, सजी-धजी जापी असम की सांस्कृतिक प्रतीक बन गई है। हालांकि अब इसका उपयोग अक्सर मेहमानों को प्रसन्न करने के लिए आधिकारिक कार्यों में किया जाता है।
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जोराई (घंटी धातु)

असम के हर घर में जोराई का उपयोग होता है। घंटी धातु तांबे और टिन का एक मिश्र धातु है और इसका उपयोग मुख्य रूप से प्रार्थना के दौरान किया जाता है। असम का घंटी धातु उद्योग, बांस शिल्प के बाद दूसरा सबसे बड़ा हस्तशिल्प उद्योग है। इस उद्योग के कारीगरों को 'कहार' या 'ओरजा' कहा जाता है। असम में जौहरियों का बड़ा हिस्सा बजाली जिला के सरथेबारी में देखने को मिलता है। बता दें कि असम में 126 सीटों के लिए तीन चरणो में मतदान होना है। मतदान के लिए 27 मार्च, एक अप्रैल और छह अप्रैल की तारीख घोषित की गई है। दो मई को चुनावों के नतीजे घोषित किए जाएंगे।
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