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गड़बड़झाला: असम में एक बूथ पर महज 90 मतदाता, लेकिन वोट पड़ गए 171, जानें कैसे

Mon, 05 Apr 2021 06:53 PM IST
कुमार संभव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी

सार

  • असम में एक पोलिंग बूथ पर पड़े मतदाताओं से ज्यादा वोट
  • 90 मतदाता वाले पोलिंग बूथ पर 171 वोट पड़े, 5 अधिकारी निलंबित
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मतदान के लिए लगी लोगों की लाइनें - फोटो : ANI
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विस्तार
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असम विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में कई गड़बड़ियां सामने आ चुकी हैं। पहले तो भाजपा नेता की गाड़ी में ईवीएम मिलने पर हंगामा हुआ, लेकिन अब 90 मतदाताओं वाले बूथ पर 171 वोट पड़ने की जानकारी मिली है। इसके बाद चुनाव अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं, पांच अफसरों को निलंबित कर दिया गया है। 

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यह है पूरा मामला

जानकारी के मुताबिक, असम के दीमा हसाओ जिले में एक मतदान केंद्र पर बड़ी अनियमितता का खुलासा हुआ। इस पोलिंग बूथ पर सिर्फ 90 मतदाता पंजीकृत हैं, लेकिन दूसरे चरण के मतदान के दौरान कुल 171 वोट पड़े। एक अधिकारी ने बताया कि यह मतदान केंद्र हाफलोंग विधानसभा क्षेत्र में है। यहां दूसरे चरण के तहत एक अप्रैल को मतदान हुआ था, जो करीब 74 प्रतिशत था। यह घटना सामने आने के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी ने मतदान केंद्र के पांच चुनाव अधिकारियों को निलंबित कर दिया। साथ ही, इस पोलिंग बूथ पर दोबारा मतदान कराने का प्रस्ताव रखा है।

ये अधिकारी किए गए निलंबित

बताया जा रहा है कि यह मतदान केंद्र खोटलिर एलपी स्कूल के 107 (ए) में था। यहां गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद दीमा हसाओ के पुलिस उपायुक्त सह जिला निर्वाचन अधिकारी ने दो अप्रैल को ही निलंबन आदेश जारी कर दिया, लेकिन यह मामला सोमवार (5 अप्रैल) को प्रकाश में आया। बता दें कि काम में लापरवाही बरतने के आरोप में चुनाव आयोग ने एस ल्हांगुम (सेक्टर ऑफिसर), प्रह्लाद सी रॉय (पीठासीन अधिकारी), परमेश्वर चारंगसा (प्रथम मतदान अधिकारी), स्वराज कांति दास (द्वितीय मतदान अधिकारी) और एल थीक (तृतीय मतदान अधिकारी) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
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ग्राम प्रधान ने अपनी सूची से कराया मतदान

अधिकारियों ने बताया कि इस मतदान केंद्र पर मतदाता सूची में सिर्फ 90 नाम थे, लेकिन ईवीएम में 171 वोट पड़े। एक अधिकारी ने बताया कि ग्राम प्रधान ने मतदाता सूची स्वीकार करने से इनकार कर दिया था और वह अपनी सूची लेकर आ गया। इसके बाद गांव के लोगों ने उसी सूची के हिसाब से मतदान किया। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि चुनाव अधिकारियों ने ग्राम प्रधान की मांग क्यों स्वीकार ली? यह भी पता लगाया जा रहा है कि वहां सुरक्षाकर्मी तैनात थे या नहीं और इस मामले में उनकी भूमिका क्या रही?
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