मामला कोर्ट में पहुंचा तो आरोपियों ने बैकडेट में जमा करा दी राशि
मोंटेसरी स्कूल में नर्सरी और केजी के बच्चे पढ़ते हैं। आरोप है कि सीआरपीएफ के बड़े अफसरों ने बच्चों से ली गई फीस में भी गबन कर दिया। सूत्रों का कहना है कि अफसरों ने करीब चार लाख रुपये की राशि गलत तरीके से हड़प ली और उन्होंने अपने ऐशो-आराम के लिए उस राशि का इस्तेमाल किया। बाद में जब यह मामला कोर्ट में पहुंचा तो आरोपियों ने आनन-फानन में वह राशि बैकडेट से स्कूल खाते में जमा करा दी। आरोपियों में से एक अफसर जो कि अब डीआईजी बनकर दूसरी जगह पोस्टिंग ले चुका है, उसने जाते-जाते अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर एक मिनिस्ट्रयिल शाखा के एएसआई पर वह राशि डाल दी। मतलब, वह अधीनस्थ कर्मचारी अपने वेतन से चार लाख रुपये उन अफसरों को दे। एएसआई पर दबाव डाला गया कि वह इस मामले को अपने सिर पर ले ले। जब उसने अपने अफसरों की बात नहीं मानी तो एएसआई की जांच बैठा दी गई।
खास बात यह है कि नौ माह बाद भी उसकी जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई। सीआरपीएफ के एक अन्य अधिकारी का कहना है कि एएसआई पूरी तरह बेकसूर है। जब उसका कहीं कोई फॉल्ट ही नहीं है तो फिर जांच रिपोर्ट में उसके खिलाफ क्या निकलेगा। पीड़ित एएसआई ने आरटीआई के माध्यम से जांच रिपोर्ट जानने का प्रयास किया तो उसमें भी कोई जवाब नहीं मिला। अब एक बार फिर उसने आरटीआई लगाकर अपनी जांच रिपोर्ट लेने की मांग की है।
अब जानिये वह रोचक बातचीत, डीआईजी पहले क्या बोले, फिर क्या बोले
गुवाहाटी के सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर में तैनात डीआईजी सीटी वैंक्टेश से जब उनके मोबाइल फोन पर बातचीत की गई तो उन्होंने क्या कुछ कहा। पहले तो डीआईजी बोले, हां हां मैं सुनील कुमार को जानता हूं, उनका केस मेरे पास आया है। मैने पूछा सर, फिर तो सारा मामला आपके संज्ञान में है। उन्होंने कहा हां। मैने पूछा, सर अब यह मामला केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के पास भेजा गया है। यह सुनते ही डीआईजी साहब थोड़ा हड़बड़ा गए और बोले, मुझे कुछ नही मालूम। आप सुनील कुमार से ही पूछ लें। मैने कहा, सर आप सक्षम अधिकारी हैं, आपको भी शिकायत भेजी है। डीजीआई बोले, मैं नहीं जानता कौन सी शिकायत है, मेरे संज्ञान में कुछ नहीं है।