फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली चलो: भारत छोड़ो आंदोलन की 79वीं वर्षगांठ पर आठ अगस्त को लगेगा नया नारा, 222 अंग्रेजी कानूनों भारत छोड़ो

Sat, 24 Jul 2021 01:39 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अंग्रेजी कानूनों का विरोध करने के लिए आठ अगस्त को बड़ी संख्या में लोग जंतर-मंतर पर जुटेंगे। अंग्रेजी कानूनों को हटाने और अमेरिका, फ्रांस और सिंगापुर की तरह कानून बनाने की मांग के लिए यह दिन इसलिए चुना गया है क्योंकि इस दिन भारत छोड़ो आंदोलन की 79वीं वर्षगांठ है।
विज्ञापन
अश्विनी उपाध्याय
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अंग्रेजों के जमाने में बने 222 कानूनों का बहिष्कार करने के लिए आठ अगस्त को जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना है। इस कार्यक्रम का आयोजन भारतीय जनता पार्टी के नेता और पेशे से वकील अश्विनी उपाध्याय ने किया है। उन्होंने बताया  अंग्रेजों के जमाने में बने कानूनों को खत्म करने के लिए हम जनता के साथ सभी अंग्रेजी कानूनों की होली जलाएंगे। हमने बड़ी संख्या में लोगों को दिल्ली आने और जंतर-मंतर पर पहुंचने का आह्वान किया है। 

विज्ञापन


इस आंदोलन के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा जिस प्रकार महात्मा गांधी ने 1942 में अंग्रेज भारत छोड़ो का नारा जनता को दिया, वैसे ही हम भी काले अंग्रेजी कानूनों भारत छोड़ो का नारा दे रहे हैं। अंग्रेजों को गए सालों बीत गए लेकिन हम पर अभी तक यह कानून लादा हुआ है। जबकि इन्हीं कानूनों की वजह से न नक्सलवाद बंद हो रहा है और न माओवाद, न कट्टरवाद। इन कानूनों के कारण ही 70 हजार करोड़ का कॉमनवेल्थ घोटाला हो या 1लाख 76 हजार करोड़ का टूजी घोटाला, भ्रष्टाचार करने वाले बाहर घूम रहे हैं। वर्तमान के कई कानून अपराधियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं और उनके संसद और विधानसभा में पहुंचने का रास्ता बना रहे हैं।

उपाध्याय ने बताया कि 1857 की क्रांति के बाद लोगों को दबाने और डराने के लिए 1860 में इंडियन पीनल कोड और 1861 में पुलिस एक्ट बना था। अंग्रजों के बनाए इस घटिया काले कानूनों की बदौलत ही पश्चिम बंगाल में लोगों पर अत्याचर होते रहे, हत्याएं होती रही, लोगों के घर जलाए गए लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया। इसी कानून का नतीजा है कि कश्मीर में अलगाववादी लाउडस्पीकर से आवाज दे रहे थे कि कश्मीर छोड़ो, लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया। यदि पुलिस ने उस समय कार्रवाई की होती तो कश्मीर से पलायन नहीं होता। 
विज्ञापन


नए कानून बनने से मुकद्मों का फैसला जल्द होगा
उपाध्याय कहते हैं कि अंग्रेजों के जमाने के कानून के कारण अभी मुकद्मों का फैसला आने में सालों लग जाता हैं और लोग न्याय के लिए टकटकी लगाए रहते हैं। कानून बदलने से मुकद्मों का फैसला जल्दी होगा, और यदि किसी नेता के ऊपर कोई मुकद्मा चल रहा है तो उस पर भी जल्द फैसला होगा। 

अमेरिका और फ्रांस की तरह हो कानून
भाजपा नेता का कहना है कि भारत में भी अमेरिका, फ्रांस और सिंगापुर की तरह कानून होने चाहिए जिसमें फैसले जल्द हों, लोगों को जल्द न्याय मिले और उन्हें सरकारी विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें। कठोर कानून होगा तो मुनाफाखोरी, रिश्वतखोरी, मानव तस्करी समेत समाज की कई बुराईयां खत्म हो जाएगी। लूटतंत्र बना रहे इसलिए यह कानून बना हुआ है। सरकार को अमेरिका, फ्रांस और सिंगापुर के कानूनों का अध्ययन करके देश में नया कानून जल्द बनाना चाहिए।  सरकार यदि चाहे तो मात्र छह महीने में ये सारे कानून बदले जा सकते हैं।
विज्ञापन


कौन से कानून अब तक लागू हैं जो अंग्रेजों के जमाने का है 

1836-बंगाल डिस्ट्रिक्ट एक्ट
1844- सेंट्रल एक्साइज एक्ट
1850-पब्लिक सर्वेंट (इंक्वायरीज) एक्ट 
1860- इंडियन पीनल कोड, 
1861- पुलिस एक्ट
1869- डिवोर्स एक्ट
1872- एविडेंस एक्ट
1882-ट्रांसफर ऑफ प्रोपर्टी एक्ट
1874-मैरिड वीमन प्रोपर्टी एक्ट
1880-रिलीजियस प्रोपर्टी एक्ट

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें