एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित होंगे देश के अगले वायुसेना प्रमुख। 3300+ घंटे की उड़ान, मिराज-2000 और तेजस का अनुभव रखने वाले नए आईएएफ चीफ की शिक्षा, करियर और प्रमुख ऑपरेशन्स की पूरी प्रोफाइल।
भारत के नए वायुसेना प्रमुख का एलान हो गया है। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को इस पद पर नियुक्त किया गया है। वे 31 अक्तूबर 2026 को मौजूदा वायुसेना प्रमुख अमर प्रीत सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद अगले एयर चीफ मार्शल का पदभार ग्रहण कर लेंगे। अपने करीब 40 साल के वायुसैनिक के तौर पर करियर में एयर मार्शल दीक्षित ने कई बड़े सम्मान और उपलब्धियां अपने नाम की हैं। वायुसेना में उन्हें एयरक्राफ्ट उड़ाने में सबसे पारंगत और अनुभवी वायुसैनिक के तौर पर पहचाना जाता है।
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आइये जानते हैं एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित के बारे में अहम बातें....
कौन हैं एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित?
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित का सैन्य करियर लगभग चार दशकों का रहा है, जिसमें उन्होंने कई अहम अभियानगत, कमान संभालने से जुड़े और स्टाफ के पदों पर सेवाएं दी है।
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भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख नियुक्त हुए एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित।
- फोटो : अमर उजाला
मिराज से लेकर मिग-21, जगुआर से लेकर तेजस तक उड़ाने का अनुभव
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित एक क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट हैं। उनके पास 3,300 से अधिक घंटों का विस्तृत उड़ान अनुभव है।
उन्होंने 20 से ज्यादा तरह के एयरक्राफ्ट उड़ाए हैं। इनमें मिराज-2000, मिग-21, मिग के अन्य वैरिएंट्स, जगुआर, एलसीए तेजस, एचपीटी-32, एन-32, एवरो, किरण, आईएल-78 और हॉक शामिल हैं।
कौन से प्रमुख पद और जिम्मेदारियां संभालीं?
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित मौजूदा समय में भारतीय वायुसेना के 51वें उप-प्रमुख के पद पर हैं।
मई 2025 से उन्होंने चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (सीआईएससी) के रूप में कार्य संभाला।
वे सेंट्रल एयर कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ भी रहे हैं।
एयर हेडक्वार्टर में वे डिप्टी चीफ ऑफ द एयर स्टाफ, असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) और असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (प्लान्स) जैसे शीर्ष पदों पर रहे।
कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर लंबा अनुभव
उन्होंने मिराज-2000 स्क्वाड्रन का नेतृत्व किया तथा फ्रांस से नए मिराज विमानों की भारत डिलीवरी और इंडक्शन प्रक्रिया का संचालन किया।
वे बंगलूरू स्थित एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट (एएसटीई में फ्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन के कमांडिंग अफसर रहे।
उन्होंने पश्चिमी क्षेत्र में एक अग्रिम पंक्ति के फाइटर बेस और दक्षिणी क्षेत्र में फाइटर ट्रेनिंग बेस की कमान संभाली।
किन प्रमुख सैन्य अभियानों से जुडे़, क्या हैं अहम उपलब्धियां?
आशुतोष दीक्षित ने 1999 के करगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन सफेद सागर, जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन रक्षक, कोप-इंडिया और ऑपरेशन सिंदूर में सक्रिय रूप से भाग लिया।
वे एलसीए तेजस और अन्य स्वदेशी एयरोस्पेस परियोजनाओं को बढ़ावा देने तथा सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के प्रबल समर्थक माने जाते हैं।
एएसटीई में रहते हुए उन्होंने जगुआर और मिग-27 फाइटर जेट्स के एविओनिक्स (उपकरण, ढांचे और सिस्टम) अपग्रेड प्रोग्राम में मुख्य भूमिका निभाई।
डायरेक्टर ऑफ एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट्स के तौर पर उन्होंने 'मीडियम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट' (एमएमआरसीए) प्रतियोगिता के तकनीकी विश्लेषण और परीक्षणों की योजना बनाई और इसका संचालन किया।
सीआईएससी के रूप में उनके कार्यकाल में 20 संयुक्त सैन्य सिद्धांतों, 'रणसंवाद 2025 और 2026', और 'डिफेंस फोर्सेस विजन 2047' रोडमैप की रूपरेखा तैयार की गई।
आईएएफ के नए प्रमुख नियुक्त हुए एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित।
- फोटो : अमर उजाला
थिएटर कमांड योजना में उनका क्या योगदान?
एकीकृत थिएटर कमांड का खाका तैयार किया
मई 2025 से चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भारत को एकीकृत थिएटर कमांड संरचना की ओर ले जाने और तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और एकीकरण को मजबूत करने में केंद्रीय भूमिका निभाई। उनका मुख्य ध्यान थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच आपसी समन्वय, रणनीतिक एकीकरण और संयुक्त परिचालन क्षमता बढ़ाने पर रहा। बताया जाता है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने वायुसेना के थल सेना और नौसेना से समन्वय में अहम भूमिका निभाई थी, जिससे भारत को पाकिस्तानी सेना पर बढ़त बनाने में बड़ी मदद मिली।
एकीकरण के लिए शुरू कीं कई पहल
हेडक्वार्टर इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने संस्थागत स्तर पर एकीकृत सैन्य सोच को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए। इसके अलावा उन्होंने भविष्य की तकनीक-संचालित और पूरी तरह से एकीकृत भारतीय सेना के निर्माण के लिए डिफेंस फोर्सेस विजन 2047 रोडमैप तैयार किया।
उप-सेना प्रमुख के तौर पर भी थिएटर कमांड पर जारी था काम
मौजूदा समय में 51वें उप-वायु सेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने के बाद भी वे वायुसेना के आधुनिकीकरण के साथ-साथ अन्य सशस्त्र बलों के साथ मिलकर थिएटर कमांड संरचना को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।