कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने सोमवार सुबह जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ बैठक की। वहीं, देर शाम सचिन पायलट भी उनसे मिलने पहुंचे। इसके अलावा राजस्थान के विधानसभा चुनावों को लेकर भी दिल्ली में बैठक होनी है। इसमें प्रदेश के सभी वरिष्ठ कांग्रेस नेता शामिल होंगे। इस बैठक में पायलट को भी बुलाया गया है।
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस में अशोक गहलोत और सचिन पायलट खेमे के बीच चल रहा सियासी युद्ध अब निर्णायक स्थिति में है। ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान के स्तर पर अब कोई न कोई हल निकालने के अंतिम प्रयास किए जा रहे हैं। इसी बीच आए सीएम गहलोत के बयान ने एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ा दी है। गहलोत ने हाईकमान से मुलाकात के पहले पायलट पर तंज कसकर सुलह फॉर्मूले की गुंजाइश पर ही सवाल उठा दिए। गहलोत ने साफ तौर पर इशारा किया है कि वे पायलट की मांगों के सामने सरेंडर करने को तैयार नहीं हैं। सीएम पायलट को संगठन में अच्छा पद देने और उनके मुताबिक कमेटी में लेने के लिए भी राजी नहीं है। गहलोत ने अपने इस बयान के जरिए पायलट के साथ ही कांग्रेस हाईकमान को भी संदेश देने की कोशिश की है।
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इधर, भाजपा सरकार में हुए भ्रष्टाचार पर कार्रवाई और पेपर लीक के मुद्दे पर सचिन पायलट के अल्टीमेटम 30 मई को खत्म होने जा रहा है। इसी बीच कांग्रेस हाईकमान मामले में सुलह की कोशिश में जुटा हुआ है। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने सोमवार सुबह जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ बैठक की। वहीं, देर शाम सचिन पायलट भी उनसे मिलने पहुंचे। इसके अलावा राजस्थान के विधानसभा चुनावों को लेकर भी दिल्ली में बैठक होनी है। इसमें प्रदेश के सभी वरिष्ठ कांग्रेस नेता शामिल होंगे। इस बैठक में पायलट को भी बुलाया गया है। कांग्रेस नेतृत्व की चुनावी राज्यों के शीर्ष नेताओं के साथ अलग अलग बैठक हो रही है। सबकी निगाहें गहलोत-पायलट मामले को लेकर मल्लिकार्जुन खरगे से होने वाली बैठक पर टिकी हुई है।
अमर उजाला से बातचीत में राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार संदीप दहिया कहते हैं कि, प्रदेश के चुनाव में अब बहुत ही कम वक्त बचा है। ऐसे में पायलट गुट द्वारा मुख्यमंत्री बदलने जैसी मांग का अब कोई मतलब नहीं है। सीएम गहलोत द्वारा हाल ही में शुरु किए गए राहत कैंप और नई योजनाओं का प्रदेश में सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। लेकिन कांग्रेस के भीतर चर्चा है कि सचिन पायलट का आखिर क्या होगा। उन्हें कौन सा पद दिया जाएगा। इसी बीच सोमवार को आए गहलोत के बयान ने नई सियासी चर्चाएं छेड़ दी हैं।
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दहिया बताते है कि, सीएम ने अपने बयान में साफ कहा है कि 'हाईकमान और कांग्रेस पार्टी आज भी मजबूत है। ऐसी स्थिति कभी नहीं आई है कि आप किसी को मनाने के लिए ऑफर करो कि आप कौन सा पद स्वीकार करोगे? ऐसा आज तक कभी नहीं हुआ। और न कभी होगा। कांग्रेस बहुत मजबूत संगठन है।' सीएम के इस बयान के बाद हाईकमान के लिए भी नया संकट खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेतृत्व सचिन पायलट को कुछ जिम्मेदारी सौंपने की सोच भी रहा होगा तो इस बयान के बाद उसे एक बार विचार जरुर करना होगा। अगर पार्टी सचिन को कुछ जिम्मेदारी सौंपती है तो इसका अर्थ साफ होगा कि कांग्रेस आलाकमान सचिन पायलट के दबाव में आ गया है। ऐसे में सीएम के इस नए बयान ने सचिन और कांग्रेस नेतृत्व दोनों के लिए संकट खड़ा कर दिया है।
खरगे बोले- पार्टी हित में जो होगा उस पर चर्चा करेंगे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राजस्थान के मुद्दे पर कहा है कि नेताओं से सभी विषयों पर चर्चा करने के बाद जो पार्टी हित में होगा, वही किया जाएगा। इससे पहले पायलट की मांगों पर सीएम अशोक गहलोत ने विपक्ष की आड़ लेकर कहा था कि पेपर लीक पर मुआवजा मांगने को बुद्धि का दिवालियापन नहीं कहेंगे क्या, अब तक कभी पेपर लीक पर किसी सरकार ने मुआवजा दिया है क्या, ऐसा कभी हुआ है? गहलोत ने यह बयान गुरुवार शाम को जयपुर में सिंधी कैंप बस स्टैंड के नए टर्मिनल के लोकार्पण समारोह में दिया था। गहलोत ने मुआवजे की मांग को "दिमागी दिवालियापन' बताकर यह संकेत दे दिए कि तीनों में से किसी मांग को नहीं माना जाएगा।