राजस्थान में कांग्रेस में अंतर्कलह के चरम पर पहुंचने के बावजूद भाजपा जल्दबाजी में नहीं है। हालांकि बगावती तेवर अपनाने वाले उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट हाल ही में कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया के जरिये भाजपा नेतृत्व के संपर्क में हैं। दरअसल, भाजपा नेतृत्व की रणनीति पायलट द्वारा गहलोत सरकार को गिराने के बाद ही इस मामले में आगे भूमिका निभाने की है।
सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेतृत्व संख्याबल के मामले में आश्वस्त होना चाहता है। अब तक अधिकतम 20 विधायकों के पायलट के साथ होने की बात आ रही है। जबकि हकीकत यह है कि खुलकर महज 12 विधायक ही पायलट के साथ हैं। उस पर यह स्पष्ट नहीं है कि ये सभी गहलोत सरकार गिराने और जरूरी पड़ने पर भाजपा में शामिल होने के लिए राजी होंगे या नहीं? गहलोत सरकार को 12 निर्दलीय और छोटेदलों के विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है।