ओवैसी ने सोशल मीडिया पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आगामी विधानसभा चुनावों के कारण घरेलू गैस सिलेंडर के दाम घटाने पड़े। वह एक ऐसा माहौल चाहते हैं, जहां यदि वह चुनाव जीत जाएं तो वह बिना किसी जवाबदेही के अगले पांच साल जनविरोधी नीतियों के साथ निकाल दें।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' की अवधारणा देश में बहुदलीय संसदीय लोकतंत्र और संघवाद के लिए त्रासदी होगी। ऐसा लगता है कि इस पर विचार करने के लिए समिति का गठन बस औपचारिकता है। सरकार पहले ही इस दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय ले चुकी है।
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ओवैसी ने सोशल मीडिया पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आगामी विधानसभा चुनावों के कारण घरेलू गैस सिलेंडर के दाम घटाने पड़े। वह एक ऐसा माहौल चाहते हैं, जहां यदि वह चुनाव जीत जाएं तो वह बिना किसी जवाबदेही के अगले पांच साल जनविरोधी नीतियों के साथ निकाल दें।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति को एक समिति का अध्यक्ष नियुक्त कर राष्ट्रपति के उच्च पद की गरिमा घटा दी है। राज्यसभा में विपक्ष के पूर्व नेता को इसमें क्यों शामिल किया गया है? ऐसे किसी प्रस्ताव को लागू करने के लिए भारत के संविधान के कम से कम पांच अनुच्छेदों और कई वैधानिक कानूनों को संशोधित करना पड़ेगा।
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क्या है मामला?
इससे पहले शनिवार को एक देश एक चुनाव पर केंद्र सरकार ने आठ सदस्यीय समिति का गठन कर दिया था। कानून मंत्रालय ने इसे लेकर एक अधिसूचना भी जारी की। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय हित में देश में एक साथ चुनाव कराना वांछनीय है। ऐसे में भारत सरकार एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे की जांच करने के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन करती है।
समिति में कौन-कौन?
कानून मंत्रालय के मुताबिक, इस समिति का नेतृत्व पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद करेंगे। साथ ही इस कमेटी में गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी, गुलाम नबी आजाद, एनके सिंह, सुभाष सी कश्यप, हरीश साल्वे और संजय कोठारी सदस्य के रूप में होंगे। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल आमंत्रित अतिथि के रूप में बैठक में हिस्सा लेंगे। कानूनी मामलों के विभाग के सचिव नितेन चन्द्र उच्च स्तरीय समिति के सचिव के रूप में जिम्मेदारी निभाएंगे।