मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन में राज्यों के उच्च न्यायालयों में क्षेत्रीय भाषा के उपयोग पर सीजेआई एन वी रमना ने कहा कि यह बहुत ही गंभीर मुद्दा है। समस्या यह है कि क्षेत्रीय भाषाओं को लागू करने की मांग की गई है, खासकर तमिलनाडु में। इससे पहले जब मैं सुप्रीम कोर्ट में शामिल हुआ था एक अनुरोध आया था, जिसे अदालत की पूर्ण पीठ ने खारिज कर दिया था। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के सामने कोई प्रस्ताव नहीं आया।
उन्होंने कहा, उच्च न्यायालयों में क्षेत्रीय भाषाओं के कार्यान्वयन में बहुत सारी बाधाएं और अड़चनें हैं। कारण है, कभी-कभी कुछ न्यायाधीश स्थानीय भाषा से परिचित नहीं होते हैं, मुख्य न्यायाधीश बाहर से भी होते हैं। दूसरा, हमारे पास इतनी तकनीक/प्रणालियां नहीं हैं जहां पूरे रिकॉर्ड का स्थानीय भाषा या स्थानीय भाषा से अंग्रेजी में अनुवाद किया जा सके। कुछ हद तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक रास्ता है। हमने कोशिश की और कुछ हद तक यह साकार हो गया है। आगे की पेचीदगियों के लिए समय चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने कहा कि यहां एक प्रस्ताव पारित किया गया। यह मुख्य न्यायाधीशों और मुख्यमंत्रियों द्वारा किया गया अनुरोध था, एकमुश्त उपाय के रूप में राज्यों को बुनियादी ढांचा निधि दिया जाना चाहिए। वहीं, केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन के दौरान उन्होंने कुछ प्रस्ताव पारित किए थे। प्रस्तावों में से एक राष्ट्रीय न्यायिक अवसंरचना विकास प्राधिकरण बनाना था। उसके लिए कुछ मुख्यमंत्री मौजूदा व्यवस्था से सहमत नहीं हो सके।
अदालतों का सुरक्षित वातावरण में काम करना अत्यंत महत्वपूर्ण: रिजिजू
केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने के लिए अदालतों का एक सुरक्षित वातावरण में कार्य करना बेहत महत्वपूर्ण है। उन्होंने राज्य सरकारों से न्यायाधीशों और अदालत परिसरों में पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया। रिजिजू ने बार एसोसिएशनों को अदालतों और अदालत परिसरों में मर्यादा बनाए रखने के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए भी कहा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के प्रधान न्यायाधीश एन. वी. रमना की मौजूदगी में यहां मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के एक संयुक्त सम्मेलन को संबोधित करते हुए रिजिजू ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी ने न्याय वितरण तंत्र को बुरी तरह प्रभावित किया, लेकिन अदालतों ने डिजिटल माध्यमों के जरिए इन चुनौतियों का सामना किया।
सुप्रीम कोर्ट डिजिटल माध्यम से 28 लाख से अधिक डिजिटल सुनवाई करके दुनियाभर में पहले स्थान पर रहा है। हाई कोर्ट और अधीनस्थ अदालतों ने मिलकर लगभग दो करोड़ मामलों पर डिजिटल माध्यम से सुनवाई की। उन्होंने कहा कि मैं याद दिलाना चाहता हूं कि न्याय का स्वतंत्र और निष्पक्ष वितरण सुनिश्चित करने के लिए, यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि अदालतें सुरक्षित और अच्छे वातावरण में काम करें। मैं राज्य सरकारों से न्यायाधीशों और अदालत परिसरों को पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध करता हूं।