अरविंदर सिंह लवली को दिल्ली प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया गया है। कांग्रेस ने राजधानी दिल्ली में पार्टी को मजबूत करने की जिम्मेदारी एक बार फिर शीला दीक्षित के खास सहयोगी को बनाया है जो परिवहन मंत्री और शिक्षा मंत्री रहते हुए बेहतर काम कर चुके हैं। सिख समाज से आने वाले अरविंदर सिंह लवली बीच में एक बार अपनी उपेक्षा का आरोप लगाकर भजपा का दामन भी थाम लिया था, लेकिन लंबे समय से कांग्रेस के सिपाही रहे अरविंदर सिंह लवली का मन भाजपा में नहीं लगा और वे फिर कांग्रेस में वापस आ गए थे।
दरअसल, अरविंदर सिंह लवली का नाम आगे आने के पीछे सबसे बड़ा कारण उनका अल्पसंख्यक समुदाय का होना है। अरविंदर सिंह लवली स्वयं सिख समुदाय से आते हैं और पूरे समाज के बीच एक लोकप्रिय चेहरे के तौर पर देखे जाते हैं। उनका मुस्लिम समुदाय के लोगों से भी बहुत बेहतर संबंध रहा है। इस बार चूंकि मुस्लिम मतदाता पूरी तरह कांग्रेस के साथ एकजुट होने की कोशिश करता हुआ दिखाई पड़ रहा है, पार्टी किसी ऐसे चेहरे को सामने लाना चाहती थी जो सभी को साथ रखकर चल सके और पार्टी को दिल्ली में मजबूत बना सके।
पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल द्वारा जारी पत्र में अरविंदर सिंह लवली को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाने की जानकारी दी गई है। जबकि निवर्तमान अध्यक्ष अनिल चौधरी को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया गया है।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की दौड़ में देवेंदर यादव और कन्हैया कुमार का नाम भी चल रहा था। ओबीसी समाज से आने वाले देवेंदर यादव की मजबूत पृष्ठभूमि और पिछड़ों के बीच पार्टी का आधार बढ़ाने के लिए उनका नाम चल रहा था जबकि कन्हैया कुमार को पूर्वांचल का चेहरा बताकर अरविंद केजरीवाल के सामने एक मजबूत चेहरे के तौर पर पेश करने की कोशिश की तरह माना जा रहा था, लेकिन इन दोनों पर अरविंदर सिंह लवली भारी पड़े।