फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Arvind Kejriwal Yatra: क्या केजरीवाल भेद पाएंगे BJP का चक्रव्यूह, 'चेहरा' बनने की रणनीति कितनी होगी कामयाब?

सार

Arvind Kejriwal Yatra: आम आदमी पार्टी के विधायक वीरेंद्र कादियान ने अमर उजाला से कहा कि केंद्र सरकार कभी एक्साइज पॉलिसी के नाम पर, कभी स्कूलों में कक्षाएं बनवाने, कभी ईडी-सीबीआई रेड के बहाने और सबसे नया भूमि रजिस्ट्री में स्टैंप शुल्क में गड़बड़ी के बहाने केजरीवाल को घेरने की कोशिश कर रही है...
विज्ञापन
Arvind Kejriwal Yatra - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अरविंद केजरीवाल हरियाणा से ‘मेक इंडिया नंबर वन’ (Make India No 1) अभियान की शुरुआत कर चुके हैं। केवल दिल्ली और पंजाब के दो राज्यों में सरकार होने के बाद भी इस अभियान में वे राष्ट्रीय मुद्दे उठा रहे हैं। यह उनकी राष्ट्रीय राजनीति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने की रणनीति हो सकती है। उनकी पार्टी के नेता अभी से उन्हें अगले चुनाव में नरेंद्र मोदी के सामने विपक्ष के चेहरे के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। वे यह दावा तब कर रहे हैं जब दिल्ली में दो बार लगातार प्रचंड बहुमत की सरकार बनाने के बाद भी 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में वे एक भी सीट जीतने में नाकाम रहे हैं।

विज्ञापन


लोकसभा चुनाव में भाजपा को समर्थन देकर मतदाताओं ने संकेत दिया है कि जब राष्ट्रीय मुद्दों की बात आती है तो उनकी प्राथमिकता अरविंद केजरीवाल नहीं, बल्कि नरेंद्र मोदी होते हैं। यह सोच दूसरे राज्यों के मतदाताओं की भी रही है। इसी सोच का परिणाम रहा है कि भाजपा बड़ा जनमत हासिल करने में कामयाब रही है। इस सच्चाई को जानकर भी अरविंद केजरीवाल भाजपा के सामने बार-बार ताल ठोंकते दिखाई देते रहते हैं। उनकी इस कोशिश के क्या मायने हो सकते हैं? इसी समय आम आदमी पार्टी और उसके नेताओं पर कई गंभीर मामलों में भ्रष्टाचार करने के आरोप लग चुके हैं, और उसके कई नेता जेल में हैं। यदि यह आम आदमी पार्टी को रोकने की कोशिश है तो क्या अरविंद केजरीवाल इस चक्रव्यूह को भेद पाएंगे?

भाजपा के सामने कहीं नहीं टिकते केजरीवाल

दिल्ली भाजपा प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने अमर उजाला से कहा कि अरविंद केजरीवाल की राजनीति केवल उन्हीं जगहों पर सफल हुई है, जहां भाजपा प्रमुख खिलाड़ी नहीं रही है। दिल्ली के बाहर वे केवल पंजाब में सफल हो पाए हैं जहां उनका मुकाबला अंतर्कलह से जूझती कांग्रेस और भ्रष्टाचार के बेहद गंभीर आरोप झेल रहे अकाली दल से हुआ है। यहां भाजपा प्रमुख खिलाड़ी नहीं थी।

लेकिन उन राज्यों में अरविंद केजरीवाल कोई करिश्मा नहीं कर पाए, जहां भाजपा प्रमुख राजनीतिक शक्ति बनी हुई है। केजरीवाल ने इसी साल संपन्न हुए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गोवा के चुनाव में अपनी ताकत आजमाने की कोशिश की थी। लेकिन उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में उसके उम्मीदवारों ने केवल जमानत जब्त कराने का रिकॉर्ड बनाया। उसके प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवारों ने भी चुनाव के बाद भाजपा का दामन थाम लिया। गोवा में बड़ी कोशिश करने के बाद भी आम आदमी पार्टी केवल दो सीटों पर सफल हो पाई। उसे केवल 6.8 फीसदी वोट ही मिल पाए। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने बड़ी दावेदारी करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें कहीं सफलता नहीं मिली। 2019 के लोकसभा चुनाव में तो वे मुकाबला करने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाए। भाजपा नेता ने दावा किया कि ये चुनाव परिणाम बताते हैं कि अरविंद केजरीवाल की राजनीति भाजपा के सामने कामयाब नहीं होती।

दिल्ली में लोकसभा चुनाव में भाजपा अजेय

दिल्ली के मतदाताओं की प्राथमिकताएं बेहद स्पष्ट रही हैं। विधानसभा चुनाव में तो उन्होंने अरविंद केजरीवाल को चुना, लेकिन जैसे ही राष्ट्रीय चुनावों की बात आई, मतदाताओं ने नरेंद्र मोदी को चुना। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 46.40 फीसदी वोटों के साथ सातों सीटों पर सफलता मिली, तो 2019 के चुनाव में भाजपा अजेय होने वाली स्थिति में आ गई। उसने 56.86 प्रतिशत के साथ सातों सीटों पर सफलता दर्ज की।   

हिमाचल प्रदेश में चुनाव से पीछे हटने का आरोप

प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि इस साल के अंत में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने हैं। पहले बड़ी तैयारियों के साथ हिमाचल प्रदेश में चुनावी अभियान शुरू करने वाले केजरीवाल को अब अपनी जमीन पता चल चुकी है और वे हिमाचल में आक्रामक प्रचार करने से पीछे हट चुके हैं। गुजरात में उनकी पूरी कोशिश के बाद भी केजरीवाल का खाता खोलना मुश्किल होगा।

फिर मोदी के सामने दावेदारी क्यों करते हैं केजरीवाल

अमर उजाला के इस प्रश्न का जवाब देते हुए भाजपा नेता कपूर ने कहा कि अरविंद केजरीवाल स्वयं को मुकाबले में सबसे आगे रखकर मतदाताओं में भ्रम पैदा करने की कोशिश करते हैं। पहले दिल्ली में झूठे सर्वे के बहाने इस तरह के दावे किए जाते थे, बाद में पंजाब में भी यही रणनीति अपनाई गई। उन्हें इसका कुछ लाभ मिलता भी दिखाई पड़ा। लेकिन जैसे ही उनका मुकाबला भाजपा के सामने हुआ, केजरीवाल की यह कोशिश सफल नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि अब केजरीवाल की इस रणनीति को जनता बेहतर ढंग से समझ चुकी है, यही कारण है कि अब उनकी यह कोशिश कहीं सफल नहीं हो रही है।

केजरीवाल देंगे मोदी को टक्कर   

वहीं, आम आदमी पार्टी नेता अभी भी मानते हैं कि उन्हें जनता का साथ केवल इसलिए मिल रहा है क्योंकि उसे भी लग रहा है कि नरेंद्र मोदी का मुकाबला करने में केवल केजरीवाल ही सक्षम हैं। आम आदमी पार्टी के विधायक वीरेंद्र कादियान ने अमर उजाला से कहा कि केंद्र सरकार अरविंद केजरीवाल को घेरने के लिए रोज नए प्लान बना रही है। कभी एक्साइज पॉलिसी के नाम पर, कभी स्कूलों में कक्षाएं बनवाने, कभी ईडी-सीबीआई रेड के बहाने और सबसे नया भूमि रजिस्ट्री में स्टैंप शुल्क में गड़बड़ी के बहाने केजरीवाल को घेरने की कोशिश हो रही है। आप विधायक ने कहा कि भाजपा की यह कोशिश किसी कीमत पर सफल नहीं होगी।

कांग्रेस की जगह आप ने ली

वीरेंद्र कादियान ने कहा कि केंद्र सरकार पहले कांग्रेस और उसके नेताओं के ऊपर हमले कर रही थी, लेकिन अब उसके केंद्र में अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के नेता आ गए हैं। यह स्वयं में इस बात का प्रमाण है कि भाजपा भी आने वाले समय में केवल अरविंद केजरीवाल को ही अपने सामने टक्कर में समझ रही है। उन्होंने कहा कि उनके नेताओं के घरों-कार्यालयों पर छापेमारी कर उन्हें रोकने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि इसके बाद भी भाजपा के लिए अरविंद केजरीवाल को रोकना संभव नहीं होगा और 2024 में जो सरकार बनेगी, उसमें अरविंद केजरीवाल की भूमिका प्रमुख होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें