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राजनीतिः सॉफ्टवेयर और हिजाब विवाद वाले कर्नाटक में हिंदुत्व के साथ ईमानदारी लेकर पहुंचे केजरीवाल, पढ़ें पूरा मामला

अमित शर्मा
Updated Fri, 22 Apr 2022 10:06 PM IST

सार

केजरीवाल आधुनिक सोच वाले युवाओं की नब्ज समझते हैं। वे अपने आंदोलन के समय से लेकर आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने तक इसी सोच के युवाओं को अपने साथ जोड़कर आगे बढ़ते रहे हैं। बंगलुरु में भी उन्होंने इसी वर्ग को ध्यान में रखते हुए ईमानदार सरकार देने की बात की।
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अरविंद केजरीवाल - फोटो : वीडियो ग्रैब


केजरीवाल आधुनिक सोच वाले युवाओं की नब्ज समझते हैं। वे अपने आंदोलन के समय से लेकर आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने तक इसी सोच के युवाओं को अपने साथ जोड़कर आगे बढ़ते रहे हैं। बंगलुरु में भी उन्होंने इसी वर्ग को ध्यान में रखते हुए ईमानदार सरकार देने की बात की। उन्होंने कहा कि यदि आप (जनता) दंगा-फसाद कराने वाली सरकार चाहते हैं तो उन्हें वोट दीजिए, लेकिन यदि ईमानदार और भ्रष्टाचार रहित सरकार चाहते हैं तो हमें अवसर दीजिए। उनकी अपील युवाओं को आकर्षित करती भी दिखी।


राज्य के ईमानदार अफसर को अपने साथ जोड़कर केजरीवाल ने अपनी विश्वसनीयता बढ़ाने का काम भी किया है। आप को ज्वाइन करने वाले पूर्व अफसर के. मथाई, भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस के लिए जाने जाते हैं। उनको पिछले 9 वर्षों में 29 तबादलों और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। उन्होंने बीबीएमपी में 2000 करोड़ का होर्डिंग घोटाला सामने लाया था। मथाई ने 1984 में पंजाब में ऑपरेशन ब्लू स्टार में भी सेवा दी थी। उनके साथ आने से आम आदमी पार्टी की प्रोफाइल मजबूत हुई है। इससे आम आदमी पार्टी की युवाओं के बीच लोकप्रियता बढ़ी है।


लेकिन केजरीवाल को यह बात अच्छी तरह मालूम है कि कर्नाटक में हिंदू मतदाताओं को साधे बिना जीत की उम्मीद नहीं की जा सकती। टीपू सुल्तान या हिजाब पर उठे विवाद और प्रमोद मुथालिक के श्रीराम सेना को कर्नाटक में मिली जगह इतना इशारा अवश्य करती है कि यहां सेकुलर राजनीति के साथ-साथ सॉफ्ट हिंदुत्व को भी साथ जोड़ना पड़ेगा। यही कारण है कि अरविंद केजरीवाल ने अपने भाषण में बार-बार भगवान राम, सीता और रावण का नाम लिया। वे भाजपा और केंद्र सरकार को ‘रावण’  बताते हुए भी अपने को हिंदुत्व के साथ जोड़ते दिखाई पड़े।


कर्नाटक की चकाचौंध के बीच भी यहां के किसानों की गरीबी देश को परेशान करने वाली रही है। अपने पहले ही संबोधन में उन्होंने न केवल किसानों को साथ लिया, बल्कि एक स्थानीय बड़े किसान नेता को अपने साथ जोड़कर अपना आधार बनाने की शुरूआत भी कर दी। कोडिहल्ली चंद्रशेखर कर्नाटक के प्रसिद्ध किसान नेता हैं। वे एमडी नंजुंदास्वामी के नेतृत्व वाले किसान समूह केआरआरएस का हिस्सा थे। उन्होंने 1989 में चुनाव लड़ने के लिए कन्नड़ देशा पार्टी का गठन किया था। चंद्रशेखर ने 15वीं लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए पीआरआर प्रजा प्रगति रंगा का गठन किया। उनके आप के साथ आने से केजरीवाल को मजबूती मिली है।

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