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लोन देने में चूक व पैसे डूबने के लिए बैंकों के 6000 से ज्यादा अफसर जिम्मेदार : जेटली

Sat, 29 Dec 2018 01:10 AM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वित्तमंत्री अरुण जेटली - फोटो : PTI
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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को कहा कि लोन देने में चूक करने के लिए सरकारी बैंकों के 6,000 से अधिक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। लोकसभा में लिखित जवाब में जेटली ने कहा कि दोषी अधिकारियों को दंडित किया गया है, जिनमें बर्खास्तगी, अनिवार्य सेवानिवृत्ति और डिमोशन जैसे कदम शामिल हैं। 

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राष्ट्रीय बैंकों की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के हवाले से जेटली ने कहा, ‘वित्त वर्ष 2017-18 में 6,049 अधिकारियों को लोन देने में चूक करने का कसूरवार ठहराया गया, जिसके चलते एनपीए हुआ। दोषी अधिकारियों के खिलाफ छोटे और बड़े जुर्माने लगाए गए हैं। इतना ही नहीं, एनपीए की राशि के आधार पर तमाम मामलों में सीबीआई और पुलिस में शिकायत दर्ज करा गई है।’ 

जेटली के मुताबिक, पीएनबी और केनरा बैंक सहित 19 राष्ट्रीय बैंकों को चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 21,388 करोड़ रुपये का शुद्ध नुकसान हुआ है। जबकि वित्त वर्ष 2017-18 की समान अवधि में कुल नुकसान महज 6,861 करोड़ रुपये था।
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इधर, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि सरकारी बैंकों के 25 करोड़ से अधिक बकाया वाले किसी भी लोन खाते को जून 2014 के बाद एवरग्रीन घोषित नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि बैड लोन की पहचान में पारदर्शिता बरतने के कारण सभी वाणिज्यिक बैंकों का एनपीए साल 2016 के मार्च अंत में 5.66 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2018 के मार्च अंत में 9.62 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। उसके बाद रकम घटकर 9.43 लाख करोड़ हो गया है। 

उन्होंने कहा कि सरकारी बैंकों ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 60,713 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड रिकवरी की है। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में दोगुना है। 

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