पश्चिम बंगाल के कुछ टोल प्लाजा और सचिवालय के सामने सेना की तैनाती मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ा रुख अपना लिया है। राज्य सरकार को सूचित किए बिना तैनात की गई सेना को वापस बुलाए जाने तक उन्होंने अपना दफ्तर छोड़ने से इनकार कर दिया। वह बृहस्पतिवार देर रात तक दफ्तर में ही मौजूद थीं, लेकिन सचिवालय भवन ‘नबाना’ के पास दूसरे हुगली ब्रिज टोल प्लाजा से सेना के हट जाने की सूचना आ रही थी। हालांकि खबर लिखे जाने तक ममता बनर्जी सचिवालय में ही थीं।
उधर, सेना का कहना है कि चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। यह द्विवार्षिक अभ्यास का हिस्सा है, जिसका मकसद वाहनों की आवाजाही के बारे में आंकड़े इकट्ठा करना है। सेना ऐसा अभ्यास पूरे देश में करती है। राज्य सचिवालय में पत्रकारों से उन्होंने कहा, ‘सेना के जवान यहां क्यों तैनात किए गए हैं।
पुलिस आयुक्त ने उनसे हटने को कहा, लेकिन वे अभी भी टोल प्लाजा पर मौजूद हैं। मैं पूरी स्थिति का अवलोकन कर रही हूं। मैं अपने लोगों की रक्षक हूं और सेना के यहां मौजूद रहने तक सचिवालय से नहीं जाऊंगी।’ मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार को सूचना दिए बगैर सेना की तैनाती की गई है।