मेघालय के वेस्ट गारो हिल्स जिले में मंगलवार को स्थानीय परिषद चुनावों के नामांकन प्रक्रिया के दौरान आदिवासी और गैर-आदिवासी समूहों के बीच झड़पें हुईं। इसके बाद पुलिस की गोलीबारी में दो लोग मारे गए। सरकार ने कर्फ्यू लगा दिया है और शांति बहाल करने के लिए सेना को तैनात किया गया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
पुलिस अधीक्षक (एसपी) अब्राहम टी संगमा ने कहा कि घटना चिबिनांग क्षेत्र में हुई, जहां गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (जीएचएडीसी) चुनावों के नामांकन के दौरान झड़प हुई। उन्होंने बताया कि मृतक दोनों चिबिनांग के निवासी थे। गोलीबारी उस समय हुई, जब पुलिस गैरकानूनी रूप से जमा भीड़ को तितर-बितर कर रही थी।
संगमा ने कहा कि क्षेत्र की स्थिति अब नियंत्रण में है और जिले में और किसी घटना को रोकने के लिए कर्फ्यू लगाया गया है। शांति बहाल करने के लिए बाद में सेना को तैनात किया गया।
रक्षा प्रवक्ता ने इस पूरे मामले पर क्या कहा?
रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि नागरिक प्रशासन के अनुरोध पर वेस्ट गारो हिल्स में सेना की टुकड़ियां तैनात की गई हैं और इलाके में फ्लैग मार्च किया जा रहा है।
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हालांकि, उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि शांति बहाल करने के लिए कितनी सेना की टुकड़ियां तैनात की गई हैं। आमतौर पर सेना की एक टुकड़ी में लगभग 60 से 80 जवान होते हैं।
वेस्ट गारो हिल्स के उप आयुक्त विभोर अग्रवाल ने पश्चिमी कमान के 101 क्षेत्र के कमांडिंग ऑफिसर को पत्र लिखकर जिले के मैदान क्षेत्रों में फ्लैग मार्च की मांग की। उन्होंने कहा कि यह कदम जनता में विश्वास बहाल करने और किसी अप्रिय घटना को रोकने में मदद करेगा।
पूर्व विधायक मोमिन पर प्रदर्शनकारियों ने किया हमला
अशांति तब शुरू हुई, जब फूलबाड़ी से पूर्व विधायक एस्टामुर मोमिन सोमवार को जीएचएडीसी चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने उपायुक्त कार्यालय पहुंचे, तो प्रदर्शनकारियों ने उन पर हमला कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की थी कि गैर-आदिवासी चुनाव में भाग न लें।
24 घंटे के लिए लगाया गया कर्फ्यू
घटना के बाद 10 मार्च को आधी रात से 24 घंटे के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया। मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी 48 घंटे के लिए बंद कर दी गईं। जीएचएडीसी की कार्यकारी समिति ने 17 फरवरी को एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसके तहत उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करते समय वैध अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाणपत्र दिखाना अनिवार्य किया गया था।
विपक्ष के नेता मुकुल संगमा ने दर्ज कराई शिकायत
विपक्ष के नेता मुकुल संगमा ने मोमिन के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई और आरोप लगाया कि उनके ऊपर हमला होने के बाद उन्होंने भड़काऊ भाषण दिया। सोशल मीडिया पर उनके भाषण का एक वीडियो वायरल हुआ। इस वीडियो की अमर उजाला स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर पाया है।