ले. जनरल मनोज पांडे
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सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे तीन दिवसीय लद्दाख दौरे पर हैं। यात्रा के पहले दिन गुरुवार को उन्होंने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत की सैन्य तैयारियों की व्यापक समीक्षा की। 30 अप्रैल को थल सेनाध्यक्ष का पदभार संभालने के बाद जनरल पांडे का दिल्ली से बाहर यह पहला दौरा है। पिछले दो सालों से गलवान घाटी को लेकर चीन के साथ चले आ रहे सैन्य गतिरोध के बीच सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे की इस यात्रा का विशेष महत्व है।
तीन दिवसीय यात्रा के पहले दिन वरिष्ठ कमांडरों ने लेह में फायर एंड फ्यूरी कोर के मुख्यालय में जनरल पांडे को पूर्वी लद्दाख की सुरक्षा स्थिति के बारे में जानकारी दी। उनके दौरे को लेकर सेना ने एक बयान भी जारी किया है। सेना ने अपने बयान में बताया है कि जनरल पांडे पूर्वी लद्दाख में कई इलाकों का दौरा करेंगे। इतना ही नहीं वे सबसे कठिन और दुर्गम इलाके एलएसी पर तैनात सैनिकों के साथ भी बातचीत करेंगे।
सेना प्रमुख ने उपराज्यपाल से की मुलाकात
सेना ने अपने बयान में कहा कि सेना प्रमुख को पूर्वी लद्दाख के साथ ही सीमाओं पर सुरक्षा स्थिति के बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद, जनरल मनोज पांडे ने उत्तरी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी और फायर एंड फ्यूरी कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल ए सेनगुप्ता के साथ उपराज्यपाल आरके माथुर से मुलाकात की। इस दौरान उनके बीच केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में नागरिक-सैन्य सहयोग और विकास गतिविधियों में भारतीय सेना की भूमिका से संबंधित मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।
दोनों पक्षों के बीच विश्वास और शांति को फिर से स्थापित करना उद्देश्य
जनरल पांडे ने अपनी लद्दाख यात्रा से पहले पूर्वी लद्दाख में जारी गतिरोध का जिक्र करते हुए सेना प्रमुख ने कहा था कि भारतीय सेना का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच विश्वास और शांति को फिर से स्थापित करना है। इस दौरान उन्होंने ये भी कहा था कि यह एकतरफा मामला नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सेना का उद्देश्य पूर्वी लद्दाख में अप्रैल 2020 से पहले यथास्थिति बहाल करना था।
पूर्वी लद्दाख सीमा पंक्ति का जिक्र करते हुए सेना प्रमुख ने कहा था कि भारतीय सेना का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच "विश्वास और शांति" को फिर से स्थापित करना है, लेकिन उन्होंने कहा कि "यह एकतरफा मामला नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सेना का उद्देश्य पूर्वी लद्दाख में अप्रैल 2020 से पहले यथास्थिति बहाल करना था।
गौरतलब है कि भारत गतिरोध से पहले वाली यथास्थिति की बहाली पर जोर देता रहा है। भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख विवाद को सुलझाने के लिए अब तक 15 दौर की सैन्य वार्ता की गई है। वार्ता के परिणामस्वरूप, दोनों पक्षों ने पिछले साल पैंगोंग झील के उत्तर और दक्षिण तट पर और गोगरा क्षेत्र में अलगाव की प्रक्रिया पूरी की। भारत लगातार इस बात पर कायम रहा है कि एलएसी पर शांति द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है।