हॉटस्पॉट के चलते सील किए इलाके
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कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए देश के कई राज्यों ने कुछ इलाकों को हॉटस्पॉट केंद्र बनाया है। आइए जानते हैं कि देश में किन राज्यों ने अपने जिलों में कितने हॉटस्पॉट इलाके बनाए गए हैं...
दिल्ली में 20 इलाके सील
- मरकज मस्जिद
- निजामुद्दीन बस्ती
- शाहजहांबाद सोसाइटी
- मयूर विहार के कुछ इलाके
- पटपड़गंज
- मालवीय नगर
- संगम विहार
- सीमापुरी
- वसुंधरा एनक्लेव
- दिलशाद गार्डन
- गांधी पार्क
- मंडालवी गली नंबर एक
- पांडव नगर एच ब्लॉक गली नंबर एक
- खिचड़ीपुर गली नंबर एक-तीन
- किशन कुंज
उत्तर प्रदेश में 104 हॉटस्पॉट
- आगरा - 22
- गाजियाबाद - 13
- गौतमबुद्ध नगर - 12
- लखनऊ- 13
- कानपुर - 12
- मेरठ - 7
- महाराजगंज - 4
- सहारनपुर - 4
- वाराणसी - 4
- बुलंदशहर - 3
- बरेली - 1
राजस्थान में हॉटस्पॉट इलाके
- भीलवाड़ा
- जोधपुर
- टोंक
- जयपुर
- झुंझुनूं
- कोटा
- बीकानेर
महाराष्ट्र में हॉटस्पॉट इलाके
- मुंबई
- पुणे
- नवी मुंबई
- सांगली
- अहमदनगर
- लातुर
- रत्नागिरी
- कोल्हापुर
- नासिक
केरल में हॉटस्पॉट इलाके
- कसारागोड़
- कन्नूर
- कोजिकोड़े
- मल्लापुरम
- त्रिशूर
- एर्नाकुलम
- त्रिरूवनंतपुरम
गुजरात में हॉटस्पॉट इलाके
पंजाब में हॉटस्पॉट इलाके
लोगों की आवाजाही पर रोक
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कोरोना के खतरे को देखते हुए सरकार ने देश में 1,200 कंटेनमेंट जोन तैयार किए हैं। जिन राज्यों में 100 से ज्यादा कोरोना संक्रमित मरीज हैं, वहां सरकार ने लोगों की आवाजाही पर सख्ती कर दी है। इन इलाकों में लॉकडाउन से भी ज्यादा सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए हैं। अकेले महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा कंटेनमेंट जोन तैयार किए गए हैं। आइए जानते हैं कि देश के अलग अलग राज्यों में कितने कंटेनमेंट जोन बनाए गए हैं...
किस राज्य में कितने कंटेनमेंट जोन
- महाराष्ट्र - 401
- उत्तर प्रदेश - 105
- राजस्थान - 38
- मध्य प्रदेश - 180
- तमिलनाडु - 220
- दिल्ली - 23
- तेलंगाना - 125
- हैदराबाद - 36
- आंध्र प्रदेश - 121
आंकड़ों में देखा जा सकता है कि महाराष्ट्र में 400 से ज्यादा कंटेनमेंट जोन हैं जिसमें अकेल मुंबई में 381 और पुणे में 20 जोन तैयार किए गए हैं। कंटेनमेंट जोन और हॉस्पॉट में मामूली सा अंतर है, एक विशेष किलोमीटर के दायरे को कंटेनमेंट जोन कहा जा सकता है जबकि हॉटस्पॉट कई किलोमीटर तक फैला हो सकता है। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि अगर किसी एक जगह पर एक मरीज भी कोरोना से संक्रमित पाया जाता है तो उस जगह को कंटेनमेंट जोन माना जाएगा। कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए वहां और ज्यादा सख्ती की जाएगी।
कंटेनमेंट जोन में क्या होगा?
- इलाके की निगरानी को लेकर सख्ती
- ड्रोन और CCTV कैमरा से निगरानी
- जरूरी सामान की घर तक डिलिवरी
- स्वास्थ्य कर्मी सैनिटाइज करेंगे
- स्थानीय लोगों के आने-जाने पर रोक
- मोबाइल एप के जरिए गैर कोरोना संक्रमित मरीजों की जांच
सैनिटाइज करते स्वास्थ्य कर्मचारी
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अलग-अलग राज्यों ने कंटेनमेंट जोन के लिए अलग रणनीतियां अपनाई हैं। उड़ीसा, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने सोशल मीडिया पर एक नक्शा जारी किया है जिसमें कंटेनमेंट जोन की सीमाएं देखी जा सकती है।
चेन्नई ने दो परतों वाला कंटेनमेंट जोन तैयार किया है जिसमें नौ बड़े जोन हैं और 70 छोटे जोन बनाए गए हैं। ये दोनों जोन पांच किलोमीटर के दायरे में बने हुए हैं जहां लोगों के बाहर निकलने पर रोक है और रोजाना उस इलाके को सैनिटाइज किया जाता है।
मुंबई में सबसे ज्यादा कंटेनमेंट जोन बनाए गए है। मुंबई में अगर एक इलाके के किसी व्यक्ति को कोरोना है तो उस पूरे इलाके को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया गया है। ऐसे इलाके के हर व्यक्ति के घरों में जाकर उनके स्वास्थ्य की जांच की जा रही है।
दिल्ली में दो किलोमीटर के क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन बताया गया है। दिल्ली में पुलिस ने जगह जगह पर बैरिकेड्स लगा दिए हैं और स्थानीय कंट्रोल रूम से लोगों की आवाजाही पर निगरानी की जा रही है। वहीं जयपुर में ऐसे जोन के 20 घरों को दिन में दो बार सैनिटाइज किया जा रहा है।
भोपाल में 70 कंटेनमेंट जोन में तीन लाख से ज्यादा लोगों को सीमित कर दिया गया है। जबकि इंदौर में पांच लाख से ज्यादा लोगों को 90 कंटेनमेंट जोन के दायरे में रखा गया है। वहीं भुवनेश्वर नगर पालिका ने कंटेनमेंट जोन के लिए डेढ़ किलोमीटर का दायरा बनाया है।