एक अहम बदलाव के तहत सैन्य विमानों की उड़ान में स्वदेश निर्मित जैव ईंधन (बायो फ्यूल) का उपयोग करने को हरी झंडी दिखा दी गई है। रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को बताया कि यह मंजूरी महीनों तक चले विस्तृत स्थलीय व फ्लाइट ट्रायलों के बाद दी गई है।
सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थनेस एंड सर्टिफिकेशन (सीईएमआईएलएसी) की तरफ से अनुमति दे दिए जाने के बाद भारतीय वायुसेना के सबसे पहले अपने मालवाहक विमानों और हेलिकॉप्टरों में जैव ईंधन का उपयोग किए जाने की संभावना है।
बता दें कि जैव ईंधन गैर पारंपरिक स्रोतों से तैयार किया जाता है, जिसमें गैर खाद्य श्रेणी की वनस्पतियां और पेड़ों से मिलने वाले तेल आदि शामिल हैं। फिलहाल जैव-जेट ईंधन का निर्माण छत्तीसगढ़ में मिलने वाले जेट्रोफा के बीजों से किया जा रहा है।
रक्षा मंत्रालय की तरफ से के एक अधिकारी ने बताया कि मंगलवार को एक बैठक में सीईएमआईएलएसी ने जैव-जेट ईंधन को लेकर किए गए विभिन्न परीक्षणों और जांच का विवेचन किया। यह सारे परीक्षण और जांच शीर्ष राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सर्टिफिकेशन एजेंसियों की तरफ से तय प्रक्रिया के तहत किए गए थे। इन परीक्षणों की रिपोर्ट से संतुष्ट होने के बाद सीईएमआईएलएसी ने जैव-जेट ईंधन के उपयोग की मंजूरी दे दी।
26 जनवरी को उड़ेगा पहला सैन्य विमान
भारतीय वायुसेना के एक अधिकारी के मुताबिक, सीईएमआईएलएसी की तरफ से मिली मंजूरी के बाद अब वायुसेना 26 जनवरी को जैव ईंधन के मिश्रण वाले जेट फ्यूल से पहली बार आईएएफ एएन-32 विमान की उड़ान की प्रतिबद्धता को पूरा कर पाएगी। इस अधिकारी ने इस मंजूरी को जैव-जेट ईंधन का नागरिक विमानों में व्यवसायिक स्तर पर उपयोग की तरफ अहम कदम भी करार दिया।