प्रियंका गांधी लोकसभा चुनाव लड़ेंगी या नहीं इसका फैसला उन्हें करना है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उन्हें महासचिव और पूर्वी यूपी का प्रभारी जरूर बना दिया है लेकिन चुनाव लड़ने का फैसला प्रियंका पर ही छोड़ा है। सालों से जो समर्थक प्रियंका को सक्रिय राजनीति में देखना चाहते थे उनकी नई मांग उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से उम्मीदवार बनाए जाने की है।
प्रियंका के यूपी प्रवेश के बाद से ही कयास लगाए जा रहे हैं कि वे मां सोनिया गांधी की जगह चुनाव लड़ेंगी। कांग्रेस अध्यक्ष का रायबरेली में दिया गया भाषण ये संकेत देता है कि परिवार के तीनों सदस्य चुनाव मैदान में होंगे। राहुल ने पहले कहा कि आपके दो सिपाही और फिर तीन कहकर बताया कि हमें आपकी लड़ाई देश के अन्य जगहों पर जाकर लड़नी है।
गांधी परिवार अमेठी और रायबरेली की सीट से परिवार का दावा नहीं छोड़ना चाहता है। ऐसे में अगर सोनिया ये लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार होती हैं तो प्रियंका के लिए पार्टी को नई सीट तलाशनी होगी। एक ओर उत्साहित समर्थक प्रियंका को पीएम के सामने देखना चाहते हैं जबकि पार्टी के वरिष्ठ नेता अभी से इस तरह की मांग को खारिज कर पहले चुनाव में ऐसा कोई राजनीतिक जोखिम नहीं लेना चाहते हैं।
पार्टी में एक खेमा प्रियंका को प्रयागराज से सटी फूलपुर सीट उम्मीदवार बनवाना चाहता है। उसका तर्क है कि प्रयागराज से गांधी परिवार का पुराना सरोकार है और फूलपुर लोकसभा सीट से लड़ने का फायदा पूर्वी यूपी की कई लोकसभा सीटों को मिल सकेगा। फूलपुर सीट से खुद जवाहर लाल नेहरू और उनकी बहन विजय लक्ष्मी पंडित चुनाव लड़ चुकी हैं।