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कोरोना मृतक को दफनाने से रोकने वाली याचिका के खिलाफ आवेदन

Sat, 02 May 2020 11:09 PM IST
मुकेश कुमार झा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

  • जमीयत ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी मृतक के धार्मिक अधिकार की सुरक्षा
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supreme court - फोटो : ANI
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विस्तार
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जमीयत उलमा ए हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में उस याचिका के खिलाफ आवेदन दाखिल किया है, जिसमें कोरोना संक्रमण से मरने वाले लोगों को दफनाए जाने पर आपत्ति जताई गई थी।

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जमीयत ने आवेदन में कहा है कि याचिकाकर्ता ने कोरोना वायरस से मरे लोगों को दफनाने पर आसपास के इलाके में संक्रमण का खतरा जताया है, जो आधारहीन है।

वकील एजाज मकबूल के माध्यम से दाखिल आवेदन में कहा गया है कि इस्लाम धर्म में मरने के बाद दफनाना अनिवार्य है। ऐसा ईसाई सहित कई अन्य धर्मों में भी है। यह संविधान में अनुच्छेद-25 के तहत किसी भी धर्म को अपनाने व उसका अनुसरण करने के अधिकार में सम्मिलित है।

जमीयत ने आवेदन में कहा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, गृह मंत्रालय व डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देशों में साफ तौर पर कहा गया है कि कोरोना संक्रमण से मरने वाले लोगों को दफनाने से कोई अतिरिक्त खतरा नहीं है। 
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हालांकि उन्होंने दफनाने वाले लोगों को मृतक शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थ से बचने की सलाह दी है। अमेरिका, ब्रिटेन, इटली, कनाडा व मध्य पूर्व देशों में भी कोरोना से मरने वाले लोगों को दफनाया जा रहा है और वहां भी ऐसा करने से वायरस का प्रसार होने की बात नहीं कही गई है।

बता दें कि प्रदीप गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर कर बांबे हाईकोर्ट के 27 अप्रैल के एक अंतरिम आदेश को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने बांद्रा पश्चिम स्थित जमात कब्रिस्तान में कोरोना से मरने वाले लोगों को दफनाए जाने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
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गांधी ने यह आशंका जताई है कि कोरोना से मरने वाले लोगों को दफनाने से आसपास के इलाकों में वायरस का संक्रमण फैलने का खतरा है।

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