मुंबई पुलिस के बर्खास्त अधिकारी सचिन वाजे ने बंबई उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। याचिका में उन्होंने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और एंटीलिया बम धमकी मामले तथा कारोबारी मनसुख हिरेन की मौत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की जांच को चुनौती दी है। न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजुषा देशपांडे की पीठ ने सोमवार को एनआईए को वाजे की याचिका पर जवाब देने का आदेश दिया। वाजे इनमें से दो मामलों में अभी जेल में हैं।
अदालत की टिप्पणी- याचिका है या पीएचडी की थिसिस?
पीठ ने टिप्पणी की कि वाजे की 185 पेज की याचिका जेल से दायर की गई एक थिसिस जैसी लग रही है। अदालत ने कहा, यह याचिका है या थिसिस? इसमें ऑस्कर वाइल्ड के भी उद्धरण हैं। यह तो पीएचडी की थिसिस जैसी लगती है। इस पर वरिष्ठ वकील आबाद पोंडा ने कहा, वाजे जेल में होने की वजह से यही काम कर रहे हैं। वाजे ने अपनी याचिका में तत्काल रिहाई की मांग की है। पोंडा ने कहा कि यूएपीए के प्रावधान इस मामले में गलत तरीके से लागू किए गए हैं और एनआईए ने कानून लागू होने से पहले ही जांच शुरू कर दी थी। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ मुंबई में किसी के घर के बाहर मिले जिलेटिन का है। इसमें कोई आतंकवाद नहीं है।
याचिका में एनआईए की जांच क्षमता पर उठाए सवाल
याचिका में एनआईए की जांच क्षमता पर भी सवाल उठाए गए हैं। अदालत ने एनआईए से जवाब मांगा और मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को तय की। 25 फरवरी 2021 को एक विस्फोटक से भरी एसयूवी मुंबई में मुकेश अंबानी के पास मिली थी। एनआईए का कहना है कि वाजे और अन्य आरोपियों ने उस एसयूवी में विस्फोटक रखा और हिरेन को मार डाला। हिरेन की लाश पांच मार्च 2021 को ठाणे के मुंब्रा क्रीक पर मिली थी।