मुंबई की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने एंटीलिया बम मामले में गिरफ्तार किए गए सिपाही रियाजुद्दीन काजी की जमानत याचिका को खारिज कर दी है। एनआईए कोर्ट ने कहा कि सिपाही काजी को बिजनेसमैन मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक सामग्री रखने की साजिश के बारे में जानकारी थी।अदालत ने आगे कहा कि काजी ने इस मामले में सह-आरोपी सचिन वाजे के इशारे पर सबूतों को नष्ट किया था। इस तरह काजी ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत किए गए अपराध में सहायता की।
जब अंबानी के आवास एंटीलिया के बाहर जिलेटिन स्टिक्स से लदी स्कॉर्पियो कार मिली थी। तब सचिन वाजे के साथ काम करने वाले काजी को मुंबई क्राइम ब्रांच की क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट में तैनात किया गया था। काजी को मामले से संबंधित सबूतों को नष्ट करने में उनकी कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार किया गया था। विशेष न्यायाधीश ए टी वानखेड़े ने 1 मार्च को काजी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बारे में विस्तृत जानकारी शुक्रवार को उपलब्ध कराई गयी।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि काजी को अंबानी के आवास के पास कारमाइकल रोड पर जिलेटिन की छड़ियों से लदे वाहन को रखने के लिए रची गई साजिश के उद्देश्य की जानकारी थी। आदेश में कहा गया है कि आरोपी ने वाजे के कहने पर सबूत नष्ट करने के लिए डीवीआर और सीपीयू आदि एकत्र किए थे।
गौरतलब है कि एंटीलिया बम मामले में गिरप्तार किए गए सिपाही रियाजुद्दीन काजी पर आईपीसी की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश का पक्ष) और 201 (अपराध के सबूत मिटाने) के आरोप लगाए गए हैं। पिछले साल 13 मार्च को सचिन वाजे की गिरफ्तारी के बाद काजी की भूमिका सामने आई थी। इस मामले के अन्य आरोपियों में पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा और पूर्व पुलिसकर्मी विनायक शिंदे और सुनील माने शामिल हैं।
बता दें कि पिछले साल 25 फरवरी को दक्षिण मुंबई में अंबानी के घर के पास विस्फोटकों से भरी एक एसयूवी मिली थी। इसके बाद व्यवसायी मनसुख हिरेन ने दावा किया था कि वो एसयूवी उनकी थी और चोरी हो गई थी। इसकेकुछ दिनों बाद 5 मार्च को उन्हें ठाणे में एक नाले में मृत पाया गया था।