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पहले महिला के शव को कमर से तोड़ा फिर बांस पर लटकाकर ले गए अस्पताल

Fri, 26 Aug 2016 01:37 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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शव को बांस पर टांगकर ले जाते कर्मचारी - फोटो : indianexpress
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ओडिशा से लगातार दूसरे दिन भी एक ऐसी तस्वीर सामने आई हैं जिसमें स्थानीय शासन और प्रशासन की लापरवाही का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। बुधवार को कालाहांडी में
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पैसे की कमी और अस्पताल प्रशासन की ओर से उपर्युक्त सुविधा उपलब्ध नहीं कराए जाने की वजह से जहां एक पति ने अपनी पत्नी की लाश कंधो पर उठाकर करीब 12 किमी तक का सफर
पैदल तय किया वहीं उसके अगले ही दिन बालासोर में एक औरत की लाश को बांस पर लटकाकर ले जाते अस्पताल कर्मचारियों की भी तस्वीर सामने आई।

यह घटना ओडिशा के बालासोर में स्थित सोरो रेलवे स्टेशन की है जहां मालगाड़ी की चपेट में आने से 80 वर्षीय विधवा सालामनी बेहेरा की मौत हो गई थी। यह घटना बुधवार सुबह की है,
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जिसके बाद उनकी लाश को सोरो कम्यूनिटी सेंटर ले जाया गया।

इस घटना की सूचना मिलने के करीब 12 घंटे बाद जीआरपी लाश को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने पहुंची लेकिन वहां वहां भी एम्बूलेंस की उचित व्यवस्था नहीं थी, जिसकी वजह से कम्यूनिटी सेंटर के कर्मचारियों ने वृद्धा के लाश की हड्डियों को पहले तो कमर से तोड़ दिया फिर उसे कपड़े में लपेटा और बांस पर टांगकर पोस्टमार्टम के लिए ले गए।

नहीं मिला एम्बुलेंस

शव
घटना के बारे में सोरो स्टेशन के जीआरपी सब-इंस्पेक्टर प्रताप रूद्र मिश्रा ने बताया कि शव के पोस्टमार्टम के लिए उसे अस्पताल ले जाना था जो कि कम्यूनिटी सेंटर से करीब 30 किमी दूर है।  

इसके लिए उन्होंने एक आटो ड्राइवर को बुलाया लेकिन उसने बतौर किराया 3,500 की मांग की और हमें केवल 1000 रुपये खर्च करने का अधिकार है। उचित व्यवस्था नहीं हो पाने के कारण
सोरो कम्यूनिटी सेंटर के कर्मचारियों से मदद मांगी गई। प्रताप के मुताबिक कर्मचारियों ने महिला के शव को पहले तो कमर से तोड़ दिया उसके बाद उसे एक कपड़े में लपेट कर बांस पर टांगा और फिर दो किमी दूर स्थित रेलवे स्टेशन तक लेकर गए।

वहां से शव को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल ले जाया गया। इस घटना की जानकारी जब महिला के बेटे रबिन्द्र बारिक जो हुई तो उन्होंने इसका विश्वास ही नहीं हुआ। उन्होंने कहा, 'वे थोड़ा और मानवीय हो सकते थे। मैं पुलिस अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज करने की सोच रहा हूं। लेकिन हमारी सुनेगा कौन?'
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body - फोटो : ANI
गौरतलब है कि बुधवार को भी एक ऐसी ही अमानवीय तस्वीर सामने आई थी जिसमें कालाहांडी के जिला मुख्यालय अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता के कारण एक आदिवासी पति को
अपनी पत्नी की लाश को कंधो पर उठाकर करीब 12 किमी तक ढ़ोना पड़ा।

इस दौरान 12 साल की उसकी लड़की भी उसके साथ थी। पत्नी की लाश को अपने कंधों पर उठाए 42 वर्षीय दाना माझी और उनकी बेटी अपने आंखों के आंसू चाहकर भी नहीं रोक पा रहे थे। माझी की पत्नी अमांग दी की टीबी के कारण मंगलवार की रात मौत हो गई थी। 

यह मामला सामने आने के बाद गुरुवार को कालाहांडी से जिला प्रशासन ने जांच के आदेश भी दिए, और शाम तक जांच रिपोर्ट भी सौंप दी गई। इस रिपोर्ट में जो सबसे ज्यादा चौंकाने वाला पहलू है, वो ये है कि इस तरह की संवेदनहीनता के बाद भी अस्पताल प्रशासन को क्लीन चिट दे दिया गया।
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