चुनाव आयोग ने केंद्र सरकार से राजनीतिक दलों को मिलने वाले बेनामी चंदे की सीमा में कटौती करने का आग्रह किया है। आयोग ने अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले और पारदर्शिता लाने के लिए यह सीमा 20 हजार रुपये से घटाकर दो हजार करने को कहा है। पिछले सप्ताह विधि मंत्रालय के विधायी विभाग को भेजे पत्र में आयोग ने कहा कि राजनीतिक दलों को मिलने वाले प्रति व्यक्ति चंदे की सीमा दो हजार रुपये करने की मांग स्वीकार कर ली गई है और इसे वित्त अधिनियम का हिस्सा बनाया गया है, लेकिन बेनामी चंदे की सीमा दो हजार करने की मांग अब भी लंबित है।
इससे पहले भी आयोग ने वर्ष 2017 के मध्य में बेनामी चंदे की सीमा तय करने के लिए केंद्र को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29सी में संशोधन करने के लिए पत्र लिखा था। आयोग के अधिकारी ने स्पष्ट किया कि आयोग का मानना है कि बेनामी चंदे की सीमा 20 हजार रुपये रखी गई है और इसकी घोषणा जरूरी नहीं है। ऐसे में संभावना है कि नकद राशि स्वीकार की जाएगी।
अधिकारी ने कहा कि यह दो हजार रुपये से अधिक के नकद चंदे पर प्रतिबंध के विपरीत है। राजनीतिक दलों के बेनामी चंदे को स्वीकार करने पर कोई संवैधानिक या कानूनी पाबंदी नहीं है, लेकिन जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29सी के तहत घोषणा की अनिवार्यता के माध्यम से बेनामी चंदे पर परोक्ष रूप से आंशिक प्रतिबंध है, लेकिन केवल 20 हजार रुपये से अधिक बेनामी चंदे को घोषित करना जरूरी किया गया है।