महाराष्ट्र में कई इलाके सूखे की चपेट में आ गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के एक अधिकारी का कहना है कि राज्य सरकार ने 151 तहसीलों में सूखे की घोषणा की है। ऐसे में ना केवल गांवों में रहने वाले लोग परेशान हैं बल्कि जंगलों में रहने वाले जंगली जानवरों को भी परेशानी हो रही है। जंगलों में कहीं पानी ना मिलने पर बाघ और तेंदुए जैसे जंगली जानवर गांवों की ओर बढ़ रहे हैं। राज्य के वन विभाग ने इस बात की जानकारी दी है।
यहां चंद्रपुर जिले के रेंज वन अधिकारी अरुण गौड का कहना है, "जंगल में पानी के स्रोत सूखने से जंगली जानवर जैसे बाघ और तेंदुए गांव के कुओं की ओर बढ़ रहे हैं।" यह क्षेत्र अंधारी-ताडोबा वन अभ्यारण्य की सीमा पर है। यहां बाघ रहते हैं। गौड का कहना है कि वन अभ्यारण्य की सीमा से लगे गांवों में रहने वाले आदिवासियों ने रेंजरों को बड़ी बिल्ली के देखे जाने की सूचना दी थी।
इससे इस इलाके में रहने वाले जानवरों और इंसानों दोनों के लिए खतरा बढ़ रहा है। बीते हफ्ते जटलापुर गांव के 45 साल के कावडु मसराम को एक बाघ ने मार दिया था। ये बाघ जंगल के बाहर इस इलाके में भटक गया था।
इस मामले पर वन अधिकारियों का मानना है कि बाघ पानी की तलाश में गांव में आया होगा और इसी दौरान उसने मसराम पर हमला कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि इस साल केवल चंद्रपुर जिले में ही 12 लोगों को बाघों ने मार दिया है। बीते महीने की शुरुआत में चंद्रपुर की चैमूर तहसील में तेंदुए के एक बच्चे तो बचाया गया था, जो कुंए में गिर गया था। समय पर वन अधिकारी वहां पहुंच गए थे, जिसके बाद तेंदुए के बच्चे को उसकी मां तक पहुंचाया गया।
हालांकि सभी तेंदुए इतने खुशकिस्मत नहीं होते। नौ अप्रैल को दो तेंदुए के बच्चे सतारा जिले के एक गन्ने के खेत में जिंदा जलकर मर गए। जैसे ही तेंदुए के ये बच्चे खेतों में आए तो उन्हें देखते ही स्थानीय लोगों ने आग लगा दी थी।
वन अधिकारियों का कहना है कि यहां जंगलों के करीब रहने वाले लोगों में छोटे बच्चों को पानी की तलाश के दौरान सबसे अधिक खतरा बाघों से होता है। नासिक और जुन्नर जिले से बीते सालों में तेंदुए द्वारा बच्चों पर हमला करने की कई खबरें भी आई हैं।
नासिक के एक रेंज वन अधिकारी त्रिंबक बिनर का कहना है, "कुत्ते और अन्य छोटे जानवरों का शिकार करने वाले तेंदुए गलती से छोटे बच्चों पर भी हमला कर देते हैं। बाघ और तेंदुए आमतौर पर पानी के आसपास रहना पसंद करते हैं और उसी क्षेत्र के आसपास शिकार करते हैं।"
अधिकारियों का मानना है कि गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है, ऐसे में जानवरों और इंसानों के बीच का संघर्ष भी बढ़ने की संभावना है।