बिहार के ककरौल दक्षिण में पर्यावरण, जल संरक्षण और स्वच्छता को लेकर जागरूकता कार्यक्रम हुआ। पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने ग्रामीणों से प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रकृति किसी के साथ भेदभाव नहीं करती और सभी को समान रूप से देती है। ऐसे में सवाल है कि पानी, जंगल और मिट्टी को बचाने के लिए गांव स्तर पर क्या कदम उठाए जा सकते हैं और इसमें महिलाओं की क्या भूमिका हो सकती है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
बिहार के ककरौल दक्षिण में पर्यावरण संरक्षण, जल बचाने और स्वच्छता को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने ग्रामीणों से प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रकृति और प्रभु एक ही हैं। प्रकृति इंसानों में कोई भेदभाव नहीं करती। वह सभी को समान रूप से देती है। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के सही इस्तेमाल और इनके संरक्षण को आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी बताया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।
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डॉ. अनिल जोशी ने प्रकृति को प्रभु के समान क्यों बताया?
डॉ. जोशी ने कहा कि इंसान ने प्राकृतिक संसाधनों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया है। इसका असर पानी, मिट्टी और जंगलों पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि जल स्रोत लगातार प्रभावित हुए हैं। रासायनिक उर्वरकों के अधिक इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता भी खराब हुई है। जंगलों का लगातार नुकसान हुआ है।
उन्होंने जंगल बचाने के साथ नदियों, तालाबों और पोखरों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने वेदों के मंत्र ‘माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः’ का उल्लेख करते हुए कहा कि पृथ्वी हमारी माता के समान है। इसलिए उसकी रक्षा करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्वच्छता को भी स्वस्थ समाज की पहली जरूरत बताया और महात्मा गांधी के स्वच्छता संबंधी विचारों का उल्लेख किया।
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जल संरक्षण और स्वच्छता में महिलाओं की भूमिका क्यों अहम बताई गई?
कार्यक्रम के दौरान डॉ. जोशी ने स्थानीय महिलाओं से भी बातचीत की। उन्होंने पानी बचाने, पानी की बर्बादी रोकने, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने महिलाओं की स्थानीय समस्याओं और अनुभवों को भी जाना। डॉ. जोशी ने कहा कि प्रकृति संरक्षण के काम में महिलाओं की भागीदारी बेहद जरूरी है। उनके अनुभव गांव में पानी बचाने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए पूरे समुदाय को साथ आना होगा।
गांव को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए क्या संदेश दिया गया?
कार्यक्रम में गोगर ठिया प्रभाव स्वराज विकास संघ, जगतपुर के पदाधिकारी शैलेन्द्र कुमार कर्ण और मनीष कुमार कर्ण भी मौजूद रहे। शैलेन्द्र कुमार कर्ण ने कहा कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए पानी बचाना, पानी की बर्बादी रोकना और पंचायत को साफ रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। पंचायत सचिव आनंद झा ने भी स्वच्छता, जल संरक्षण और पर्यावरण बचाने के लिए मिलकर प्रयास करने की जरूरत बताई। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत ककरौल दक्षिण के मुखिया मोहम्मद सनाउल्लाह समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को प्रकृति, पानी और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना और पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन का रूप देना था।