सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई समिति के सदस्य अनिल घनवट ने मंगलवार को कृषि कानून को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जबतक सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश हमारे पास नहीं आ जाते हैं तब तक हम काम शुरू नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे सब किसान नेताओं से मिलकर उनकी राय जानेंगे कि उनको क्या चाहिए और वो कैसे किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि ये आंदोलन कहीं रूकना चाहिए और किसानों के हित में एक कानून बनना चाहिए। क़ानूनों को रद्द करने की बजाए उनमें संशोधन होना चाहिए। आंदोलनकारी किसान नेताओं को कमेटी के साथ कार्य करके अपनी बात रखनी चाहिए।
पहले किसानों का कहना सुनना पड़ेगा, अगर उनकी कोई गलतफहमी है तो वो दूर करेंगे। किसानों को विश्वास दिलाना पड़ेगा कि MSP और APMC रहेगा। जो कुछ भी होगा वो पूरे देश के किसानों के हित में होगा।अनिल घनवट ने कहा कि हम केन्द्र के इन तीन कृषि कानूनों की सराहना नहीं कर रहे हैं, जिन्हें किसानों को आजादी देने वाला बताया गया है।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तीनों नए कृषि कानूनों के अमल पर रोक लगा दी। साथ ही गतिरोध दूर करने के लिए चार सदस्यों की एक कमेटी बनाई। इस कमेटी में भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपिन्दर सिंह मान, शेतकारी संगठन के अध्यक्ष अनिल घनवट, दक्षिण एशिया के अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति एवं अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ प्रमोद जोशी और कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी शामिल हैं।