ओडिशा में अपनी मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अनिश्चितकालीन धरने पर हैं। इतना ही नहीं, कर्मचारियों के विरोध के कारण राज्य में करीब 60,000 आंगनवाड़ी केंद्रों को भी बंद कर दिया गया। विरोध कर रहे कर्मचारियों की मांग है कि उनकी पदोन्नति की जाए। साथ ही ये कर्मी वेतन में बढ़ोतरी की मांग भी कर रहे हैं। इससे पहले सोमवार को भी करीब 50,000 आंगनबाड़ी कर्मियों ने राजधानी भुवनेश्वर में प्रदर्शन किया था। राज्य के अलग-अलग हिस्सों के आंगनबाड़ी कर्मियों ने राजधानी में एकत्रित होकर विधानसभा के शीतकालीन सत्र से पहले राज्य विधानसभा भवन के पास धरना दिया था।
प्रदर्शन कर रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मांग है कि सरकारी कर्मचारियों का टैग और आंगनबाडी कार्यकर्ताओं को 18 हजार रुपये मासिक मानदेय और सहायिकाओं को नौ हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाए। ऑल ओडिशा आंगनवाड़ी महिला वर्कर्स की अध्यक्ष सुमित्रा महापात्रा ने कहा कि इन मांगो के साथ ही हमारी 5,000 रुपये पेंशन की मांग को पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो हमारी हड़ताल खत्म नहीं होगी।
बता दें कि प्रदर्शन कर रही आंगनबाड़ी कर्मचारियों की मांग है कि सेवा काल के दौरान अगर किसी आंगनबाड़ी कर्मचारी की मौत हो जाती है तो ऐसी स्थिति में आंगनबाडी कार्यकर्ता के परिजनों को पांच लाख रुपये मुआवजा दिया जाए।
मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान, ऑल ओडिशा आंगनवाड़ी महिला वर्कर्स एसोसिएशन की सचिव झुनुपामा सत्पथी ने कहा कि आज प्रदर्शन का दूसरा दिन है। सोमवार को 50,000 महिला आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का विशाल प्रदर्शन करने के बाद हम आज से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। आज करीब 500 महिलाएं धरने पर बैठी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य के सभी 314 ब्लॉकों में हमारे साथी भी ब्लॉक कार्यालयों के पास आंदोलन कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि ममता योजना और हरिश्चंद्र योजना जैसी राज्य सरकार की प्रमुख योजनाएं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के कारण ही सफल हुई, इसके बावजूद हमारी मांगें पूरी नहीं की गई हैं।
ऑल ओडिशा आंगनवाड़ी महिला वर्कर्स की अध्यक्ष सुमित्रा महापात्रा ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को चौबीसों घंटे काम करने के बावजूद 7,500 रुपये प्रति माह मिलते हैं। वहीं, अखिल भारतीय आंगनबाड़ी महासंघ की संगठन सचिव अंजलि पटेल ने कहा कि हमने अपनी मांगों के समर्थन में राज्य सरकार को करीब 100 पत्र लिखे हैं, लेकिन सरकार ने उन पत्रों का जवाब नहीं दिया। आखिरकार मजबूर होकर हम सरकार को 15 दिन का नोटिस देकर हड़ताल कर रहे हैं।
वहीं, राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री बसंती हेम्ब्रम ने कहा कि राज्य सरकार आंगनबाडी कार्यकर्ताओं के प्रति सहानुभूति रखती है। उन्हें केंद्र और राज्य दोनों की साझी सहमति के आधार पर पारिश्रमिक मिलता है। मंत्री बसंती हेम्ब्रम ने कहा कि ओडिशा सरकार उनकी वर्तमान मांगों के संबंध में जल्द निर्णय लेगी।