आंध्र विश्वविद्यालय ने रणनीतिक अध्ययन, सैन्य मनोविज्ञान, रक्षा प्रौद्योगिकी, अंतरराष्ट्रीय संबंध, रणनीतिक प्रबंधन समेत अनुसंधान क्षेत्रों में 38 वायुसेना, नौसेना और सेना के अधिकारियों को पीएचडी में प्रवेश दिया है। आंध्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रसाद रेड्डी ने कहा कि विशाखापत्तनम में विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए रक्षा मंत्रालय के साथ विश्वविद्यालय का समझौता हुआ है। हमने पिछले तीन वर्षों में कई रक्षा कर्मियों को प्रशिक्षित किया है। इनमें विशेष रूप से तीन से छह महीने के दौरान कौशल आधारित प्रमाणपत्र कार्यक्रम शामिल हैं।
देशभर में किए गए एमओयू साइन
रेड्डी ने कहा कि देशभर में रक्षा क्षेत्र के साथ 27 अलग-अलग एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। सभी पूर्व सैनिकों के पास स्नातक की डिग्री नहीं होती है, जब वे रक्षा क्षेत्र में शामिल होते हैं। लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें नौकरी करने के लिए स्नातक की डिग्री की आवश्यकता होती है। विश्वविद्यालय ने उनके अनुभवों के आधार पर स्नातक योग्यता प्रमाण पत्र दिया हैं ताकि वे अन्य जगह अनुभव के आधार नौकरी कर सके। उन्होंने कहा कि पिछले तीन सालों में तीन हजार से अधिक सैन्यकर्मी प्रमाण पत्र ले चुके हैं।
योग्यता के आधार पर दिया जाता है पीएचडी में प्रवेश
रेड्डी ने बताया कि विश्वविद्यालय में कमोडोर और उससे ऊपर के रैंक वाले कर्मी कार्यकारी कोटे के तहत पीएचडी में प्रवेश दिया जाता है। विश्वविद्यालय मे रक्षा प्रौद्योगिकी, सामरिक प्रबंधन, सैन्य मनोविज्ञान आदि में अनुभव के आधार पर पीएचडी की डिग्री प्रदान दी जाती हैं।
सैनिकों को विश्वविद्यालय का डिप्लोमा कोर्स नौकरी में करेगा मदद
सैनिकों को उनकी सेवा के दौरान उनके संबंधित ट्रेडों जैसे इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, सिविल, गनर और मिसाइल मेंटेनर में प्रशिक्षित किया जाता है, लेकिन उनके पास किसी भी सरकारी विश्वविद्यालय या संस्थान से कोई योग्यता प्रमाणपत्र नहीं होता है। ऐसे में रिटायर्ड होने के बाद वे बाद वे किसी भी कंपनी में शामिल होने में असमर्थ होते हैं। वीसी ने कहा कि विश्वविद्यालय से जारी डिप्लोमा कार्यक्रम सभी पूर्व सैनिकों को उपयुक्त नौकरी पाने में मदद करेगा।