भूमिगत समस्याओं पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि नेल्लोर जिले में 43,000 एकड़ डॉटेड लैंड है। प्रकाशम जिले में 37,000 एकड़ और कडपा में 22,000 एकड़ डॉटेड लैंड है। सभी जिलों में करीब दो लाख एकड़ डॉटेड लैंड हैं।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई एस जगन रेड्डी ने शुक्रवार को एक सार्वजनिक बैठक के दौरान अहम निर्णय लिए। उन्होंने ब्रिटिश युग के दो लाख एकड़ 'डॉटेड लैंड' को एक लाख किसानों के हवाले कर दिया।
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उन्होंने बताया कि इन जमीनों को पंजीकृत कानून की धारा- 22 ए से हटा दिया गया है। उनके इस कदम से करीबन 97,471 परिवारों को लाभ होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा- "क्या आपको मालूम है 22ए के तहत बंद इन जमीनों की कीमत क्या है? इन जमीनों का निबंधन मूल्य करीबन 8,000 करोड़ रुपये है और बाजार में इनकी कीमत 20,000 करोड़ रुपये है। हम 97,471 परिवारों को 2,06,170 एकड़ जमीन पर सभी अधिकार दे रहे हैं।"
उन्होंने बताया कि ब्रिटिश जब 100 साल पहले इन जमीनों पर स्वामित्व हासिल नहीं पाए थे तो उन्होंने इसे ऐसे ही छोड़ दिया था। इस वजह से दशकों इन जमीनों पर खेती करने वाले किसान स्वामित्व, पंजीकरण और म्यूटेशन की कमी के कारण पीड़ित थे।
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सीएम ने कहा कि इन भूमि के मुद्दों को हल करने के बजाय, तत्कालीन टीडीपी सरकार ने 2016 में मेमो जारी कर 22 ए श्रेणी के तहत पंजीकरण पर ही प्रतिबंध लगा दिया था।
भूमिगत समस्याओं पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि नेल्लोर जिले में 43,000 एकड़ डॉटेड लैंड है। प्रकाशम जिले में 37,000 एकड़ और कडपा में 22,000 एकड़ डॉटेड लैंड है। सभी जिलों में करीब दो लाख एकड़ डॉटेड लैंड हैं। सीएम ने कहा कि ये सभी समस्या शुक्रवार को एक ही झटके में खत्म हो चुके हैं।