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Andhra Pradesh: ऑटोरिक्शा में सवार लोगों ने ट्रांसजेंडर महिला से की छेड़छाड़; चार के खिलाफ मामला दर्ज

Mon, 19 Jun 2023 08:04 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, विशाखापत्तनम

सार

पुलिस ने बताया कि आठ जून को 26 वर्षीय एक दलित ट्रांसजेंडर महिला एक स्थानीय थिएटर में फिल्म देखने के बाद जगदम्बा जंक्शन से हनुमनथावाका जाने के लिए एक ऑटोरिक्शा में सवार हुई जिसमें तीन लोग पहले से ही सवार थे। थोड़ी देर बाद तीनों लोगों ने उसके प्राइवेट पार्ट्स को छूना शुरू कर दिया।
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Representational Image - फोटो : iStock
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विस्तार
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आंध्र प्रदेश पुलिस ने विशाखापत्तनम में एक ट्रांसजेंडर महिला के साथ छेड़छाड़ के आरोप में ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 2019 के तहत मामला दर्ज किया है और चार लोगों को गिरफ्तार किया है। 

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पुलिस ने बताया कि आठ जून को 26 वर्षीय एक दलित ट्रांसजेंडर महिला एक स्थानीय थिएटर में फिल्म देखने के बाद जगदम्बा जंक्शन से हनुमनथावाका जाने के लिए एक ऑटोरिक्शा में सवार हुई जिसमें तीन लोग पहले से ही सवार थे। थोड़ी देर बाद तीनों लोगों ने उसके प्राइवेट पार्ट्स को छूना शुरू कर दिया, जिससे उसे शोर मचाना पड़ा और आखिरकार पेडागडिली जंक्शन पर ऑटोरिक्शा से उतर गई। पीड़िता ने शिकायत में कहा कि एक बार जब वह उतरी, तो ऑटो चालक सहित सभी चार लोगों ने उसे पीटना शुरू कर दिया, उसके सिर पर हमला किया। 

विशाखापत्तनम के पुलिस आयुक्त त्रिविक्रम वर्मा ने सोमवार को पीटीआई-भाषा को बताया, वाहन से उतरने के तुरंत बाद उसने शिकायत की और हमने तुरंत ट्रांसजेंडर अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस ने ट्रांसजेंडर महिला से छेड़छाड़ के आरोप में वासुपल्ली श्रीनिवासु (33), हनीश कुमार (26), सतीश कुमार (30) और मनोज कुमार (23) को गिरफ्तार किया है।

उन्होंने ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 2019 के तहत आईपीसी की धारा 354 (एक महिला पर हमला) और 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) के साथ 34 (समान इरादे से कई व्यक्तियों द्वारा किया  कार्य) और धारा 18 (डी) (जीवन और सुरक्षा को खतरे में डालना) के तहत मामला दर्ज किया। तटीय जिले के ट्रांसजेंडर संरक्षण प्रकोष्ठ के नोडल अधिकारी एसीपी विवेकानंद ने कहा, यह आंध्र प्रदेश में (ट्रांसजेंडर संरक्षण अधिनियम के तहत) पहला मामला है। 
 
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यह मामला दिशा पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है, जो मॉडल स्टेशन हैं, जिसका उद्देश्य यौन उत्पीड़न (दुष्कर्म) और उत्पीड़न की शिकार महिलाओं और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 के तहत बच्चों के लिए त्वरित न्याय प्रदान करना है।
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