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एल्गार परिषद मामला: आनंद तेलतुंबडे बोले, हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराए बिना मुझे आतंकवादी नहीं कह सकती एनआईए

Wed, 30 Mar 2022 07:37 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

एल्गार परिषद मामला पुणे में 31 दिसंबर 2017 को एक सभा में कथित भड़काऊ भाषण देने से संबंधित है। पुलिस का दावा है कि उक्त भाषण के बाद पश्चिमी महाराष्ट्र के बाहरी इलाकों में कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़की थी। पुणे पुलिस ने दावा किया था कि सभा को माओवादियों का समर्थन प्राप्त था। मामले की जांच अब एनआईए कर रही है।
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आनंद तेलतुंबडे - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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एल्गार परिषद माओवादी लिंक मामले में एक आरोपी शिक्षाविद आनंद तेलतुंबडे ने बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एनआईए ने मुझे हिंसा के किसी भी प्रत्यक्ष कार्य के लिए जिम्मेदार ठहराए बिना मुझ पर आतंकवादी का ठप्पा लगा दिया है।

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तेलतुंबडे के वकील मिहिर देसाई ने हाईकोर्ट को बताया कि एनआईए ने अपने आरोपपत्र में दावा किया है कि तेलतुंबडे आतंकवादी संगठन का हिस्सा थे और उन्होंने आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दिया। लेकिन, फिर भी उन पर मामले में हिंसा के किसी निश्चित कार्य के लिए आरोप नहीं लगाया गया है।

न्यायाधीश एसबी शुकरे और जीए सनप की पीठ से देसाई ने कहा कि किसी को आतंकवादी करार देने के लिए उसका हिंसा की घटना में शामिल होना जरूरी है। वह इस मामले में तेलतुंबडे की जमानत की मांग करते हुए जिरह कर रहे थे। उन्होंने कहा, ट्रायल की जल्द शुरुआत होने की संभावना नहीं है।
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देसाई ने कहा, मेरा तर्क यह है कि एक आतंकी गतिविधि में किसी प्रकार की हिंसा होती है। अब, तेलतुंबडे किसी हिंसा में संलिप्त रहे हों यह एनआईए का मामला ही नहीं है। ऐसे में एनआईए तेलतुंबडे को आतंकवादी नहीं कह सकती है।' बता दें कि हाईकोर्ट मामले में गुरुवार को भी सुनवाई जारी रखेगी।
 
मिहिर देसाई ने कहा, 'आनंद तेलतुंबडे ने भारत में जाति के मुद्दे पर 16 किताबें लिखी हैं। वह 35 साल से नागरिक अधिकारों के लिए आंदोलन में सक्रिय रहे हैं। वह अपने करियर में भी चरम पर पहुंचे हैं।' उन्होंने कहा कि एनआईए ने मामले में सह आरोपी रोना विल्सन के कंप्यूटर से कुछ पत्र बरामद किए हैं।

'केवल आनंद नाम का जिक्र दोषी करार देने के लिए पर्याप्त नहीं'
उन्होंने आगे कहा कि ये पत्र कहते हैं कि कोई आनंद नाम का व्यक्ति कुछ राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में संलिप्त था। अगर इन पत्रों की सत्यता की जांच भी की जाती है और इन्हें सबूत भी मान लिया जाता है तो भी केवल आनंद नाम का जिक्र होने भर से तेलतुंबडे को मामले में दोषी नहीं करार दिया जा सकता।
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देसाई ने कहा कि अगर अदालत को लगता है कि तेलतुंबडे को सबूतों के आधार पर दोषी करार नहीं दिया जा सकता है, तो वह जमानत पाने के अधिकारी हैं।

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