केंद्र सरकार के विभिन्न स्तरों पर आईएएस अधिकारियों की कमी को पूरा करने के लिए आईएएस सेवा नियमों में संशोधन के भारत सरकार के प्रस्तावित कदम को लेकर कई राज्य सरकारों की गंभीर चिंताओं का हाल की मीडिया रिपोर्टों में जिक्र किया गया है। वर्तमान व्यवस्था के तहत, राज्यों से अधिकारी स्वेच्छा से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का विकल्प चुनते हैं। केंद्र इन अधिकारियों में से रिक्त पदों के लिए या निकट भविष्य में रिक्त होने वाले पदों के लिए चयन करता है।
ऐसा करते समय केंद्र, अधिकारी के पिछले अनुभव के आधार पर उसकी उपयुक्तता पर विचार करता है। एक बार चयन को अंतिम रूप देने के बाद, राज्य सरकार से संबंधित अधिकारी को कार्यमुक्त करने का अनुरोध करते हुए आदेश जारी किए जाते हैं। प्रत्येक राज्य का एक निश्चित कोटा होता है, जिससे ज्यादा उसके अधिकारियों को केंद्र द्वारा स्वीकार नहीं किया जाता है।
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का विकल्प चुनने वालों में आई गिरावट
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का विकल्प चुनने वाले अधिकारियों की संख्या में पिछले दशक में क्रमिक गिरावट आई है। 60 के दशक में जहां अवर सचिव स्तर पर भी कई आईएएस अधिकारी होते थे, वहीं, वर्तमान में केंद्र सरकार के लिए संयुक्त सचिव स्तर पर भी पर्याप्त संख्या में अधिकारियों का मिलना मुश्किल होता जा रहा है। आमतौर पर, राज्यों की कुल संवर्ग संख्या में से लगभग 25 से 30 प्रतिशत अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हुआ करते थे।
पहले केंद्रीय प्रतिनियुक्ति योग्यता की पहचान
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए पहले अधिकारियों में एक आकर्षण हुआ करता था। इसे अधिकारी की योग्यता के रूप में देखा जाता था। चयन प्रक्रिया कठिन थी। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए अधिकारियों की इस अनुपलब्धता का एक कारण करीब डेढ़ दशक पहले के कुछ वर्षों में अधिकारियों की अपर्याप्त भर्ती थी। लेकिन एक महत्वपूर्ण कारण है- राज्यों के पास तुलनात्मक रूप से बेहतर सेवा शर्तें हैं।
राज्य व केंद्र में अधिकारियों की कमी में संतुलन की जरूरत
नियमों में किसी भी बदलाव के पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि केंद्र और राज्यों में अधिकारियों की कमी में संतुलन रहे। यदि राज्य में अधिकारियों की कमी है, तो केंद्र को इसे स्वीकार करना चाहिए और वर्ष की शुरुआत में राज्य के साथ एक उचित व्यवस्था करनी चाहिए। राज्यों पर भी इसी तरह की जिम्मेदारी है।
राज्य की चिंताओं पर ध्यान दिए जाने की जरूरत
राज्यों की भी कई चिंताएं हैं जिन पर ध्यान देने की जरूरत है। यह स्पष्ट रूप से समझना होगा कि राज्यों के साथ चर्चा के दौरान जब वे उन अधिकारियों की सूची देते हैं जिन्हें वे केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए भेजना चाहते हैं, तो यह विशुद्ध रूप से राज्यों का प्रस्ताव होगा। यह प्रस्ताव राज्य की अपनी जरूरतों को ध्यान में रखकर होगा।
उप सचिव और निदेशक स्तर पर कार्य परिस्थितियों को बेहतर करना होगा
केंद्र सरकार को यह समझना होगा कि संवर्ग प्रबंधन की उत्कृष्ट सफलता सुनिश्चित करने के लिए उप सचिव और निदेशक स्तर के अधिकारियों के लिए कार्य परिस्थितियों को बेहतर करना अत्यंत आवश्यक है। यदि बड़ी संख्या में अधिकारी अपनी इच्छा व्यक्त करते हैं और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का विकल्प चुनते हैं, तो राज्यों पर संबंधित नामों की पेशकश करने का दबाव होगा। इस स्तर के कई अधिकारियों को दिल्ली में अपने बच्चों की शिक्षा, आवागमन और काफी महंगे जीवनयापन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन मुद्दों को अवश्य ही सुलझाना होगा।