भारत में महान कहे जाने वाले अशोक अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निशाने पर हैं। संघ से जुड़ी एक पत्रिका में छपे लेख में यह दावा किया गया है कि अशोक द्वारा बौद्ध धर्म अपनाए जाने और अहिंसा को बढ़ावा देने के कारण ही देश की सीमाएं विदेशियों के लिए खुल गईं जिन्होंने हम पर आक्रमण किया।
यह लेख राजस्थानी वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा प्रकाशित की जाने वाली पुस्तक 'बप्पा रावल' में लिखा गया है जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि अशोक के शासनकाल में बौद्ध धर्म ने यूनानी आक्रांताओं की मदद की। राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद संघ के आदिवासी वनवासी कल्याण आश्रम से संबंध है और इसके आश्रम का कार्यालय छत्तीसगढ़ में है।
पुस्तक में प्रकाशित लेख के मुताबिकत बौद्ध धर्म को मानने वालों का ऐसा सोचना था कि यूनानी आक्रमणकारियों की मदद करने से वैदिक धर्म समाप्त हो जाएगा और बौद्ध धर्म का सब पर दबदबा हो जाएगा। लेख में इस बात का जिक्र किया गया है कि अशोक बौद्ध धर्म ग्रहण करने से पहले महान थे लेकिन उनके धर्मांतरण के बाद अशोक ने अहिंसा से जुड़े सिंद्धांतों का कुछ ज्यादा ही प्रचार किया।
प्रकाशित लेख के मुताबिक यह भारत के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है कि जो अधोगति का कारक बना उसे ही महान माना जा रहा है। अच्छा तो यह होता कि भगवान बुद्ध की तरह सम्राट अशोक भी राजपाट छोड़ देेते, साधु बन जाते और बौद्ध धर्म का प्रचार करते। जिससे भारत को ज्यादा नुकसान नहीं होता लेकिन ऐसा न करने की जगह उन्होंने पूरे देश को बौद्ध धर्म का प्रचार केंद्र बना दिया।'
लेख में लिखा गया है कि जब भी बौद्ध धर्म के प्रति सहानुभूति रखने वाले विदेशी आक्रांता ने भारत पर हमला किया ह तो बौद्धों ने उनसे लड़ने की जगह उनका साथ दिया।' इस लेख के संबंध में पत्रिका की संपादक डॉ. राधिका लड्ढा ने बताया कि उनका मकसद बौद्ध धर्म अथवा सम्राट अशोक या किसी अन्य पर आरोप लगाने का नहीं था।
Published By Rahul Sankrityayan