आम्रपाली समूह व उसके दो ऑडिटर द्वारा उसकी 46 कंपनियों के संबंधित तमाम दस्तावेज अदालत द्वारा नियुक्त फोरेंसिक ऑडिटर को मुहैया नहीं कराने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह अदालत के आदेश की अवहेलना है। कोर्ट ने साफ किया कि जब तक सभी जरूरी दस्तावेज फोरेंसिक ऑडिटरों को मुहैया नहीं कराए जाएंगे तब तक समूह के प्रमोटर व दो निदेशक पुलिस सर्विलांस में ही रहेंगे। न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने समूह केदो ऑडिटरों के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि आप हमारे आदेशों को हल्के में न लें। पीठ ने दोनों ऑडिटरों को तीन दिनों के भीतर समूह की तमाम कंपनियों से संबंधित सभी दस्तावेज फोरेंसिक ऑडिटर के देने के लिए कहा है।
पीठ ने कहा कि यह आखिरी मौका है। अगर इसमें किसी तरह की कोताही बरती गई तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। इससे पहले पीठ ने खुद इन दोनों ऑडिटरों से सवाल-जवाब किए। पीठ ने दोनों से कहा कि आपको यह पता होगा कि समूह ने फ्लैट खरीदारों से लिए गए रकम को कहां डायवर्ट किया। समूह अगर गड़बड़ी कर रहा था तो आपका दायित्व है कि आप इस बात को संबंधित अथॉरिटी केसामने लाएं। पीठ ने दोनों को फोरेसिंक ऑडिटर को तमाम दस्तावेज मुहैया कराने का निर्देश दिया है। वहीं समूह को अपनी कंपनियों के तमाम बैंक खातों की विस्तृत जानकारी फोरेंसिक ऑडिटर को देने केलिए कहा गया है।
इससे पहले फोरेंसिक ऑडिटर ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आम्रपाली समूह ने फ्लैट खरीदारों से मिली रकम का कुछ हिस्सा ही प्रोजेक्ट्स में लगाए, बाकी रकम को फर्जी कंपनियों में डायवर्ट कर दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि समूह की ओर से टेली डाटा अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। कंप्यूटर भी उपलब्ध नहीं कराया गया है। बहुत सारे दस्तावेजों में मेल नहीं है। उन्होंने कहा कि समूह ने 242 करोड़ रुपये चार कंपनियों में डायवर्ट किए।
सीएफओ की याददाश्त’ वापस’ आई
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को समूह के सीएफओ चंदर वाधवा से सीधे तौर पर सवाल जवाब किए। वास्तव में पिछली सुनवाई में फोरेंसिक ऑडिटर ने कहा था कि सीएफओ सहयोग नहीं कर रहे हैं और वह अपनी याददाश्त खोने की बात कह रहे हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सीएफओ को पेश होने के लिए कहा था।
पीठ ने शुक्रवार को सीएफओ से कंपनी से उनके संबंध और उनकी जिम्मेदारियों के बारे में सवाल किए। सीएफओ ने पीठ के लगभग सभी सवालों के जवाब दिए। इस पर पीठ ने कहा कि आप फोरेंसिक ऑडिटर द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब क्यों नहीं दे रहे थे? पीठ ने सीएफओ से कहा कि वह अधिक स्मार्ट बनने की कोशिश न करें। पीठ ने सीएफओ को फोरेंसिक ऑडिटर को सहयोग करने के लिए कहा है।