तमिलनाडु और देश के अन्य हिस्सों में भी लोग तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयराम जयललिता (जिन्हें लोग अम्मा कहते हैं) को हमेशा ऐसी महिला के रूप में देखते हैं जो आक्रामक, कठोर और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
उनके राजनीतिक विरोधी भी इस बात को मानने से इनकार नहीं करेंगे कि उनकी अपनी पार्टी और सरकार पर तगड़ी पकड़ है। और कोई भी इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि वह देश में सबसे ताकतवर महिला राजनेताओं में से एक हैं।
हालांकि वह ऐसी नेता हैं जो दूसरों की तरह लोगों से, वोटरों से संवाद नहीं करती- सार्वजनिक सभाओं को संबोधित करने के अलावा। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक भगवान सिंह कहते हैं, "जयललिता के व्यक्तित्व का यह रहस्यमयी हिस्सा है।
यही उनकी विशेषता भी है। उन्होंने एक बार मुझे बताया था कि एक अकेली महिला के लिए राजनीति में जिंदा रहना और विवादों और घोटालों से दूर रहना कितना मुश्किल है। जो भी उनके नज़दीक आया उसने उनका इस्तेमाल किया। इसलिए उन्होंने सभी खिड़की-दरवाजे बंद कर लिए।"
वह कहते हैं, "लेकिन उनके राजनीतिक जीवन को देखिए। वह आक्रामक, अहंकारी और कठोर रही हैं। लेकिन इन्हीं खासियतों के चलते लोग उन्हें पसंद करते रहे हैं। उन्होंने द्रविड़ आंदोलन के बुजुर्ग डीएमके के करुणानिधि से टक्कर ली। लोगों को यह अच्छा भी लगा। लोग उन्हें 'लोहे की तितली' भी कहते हैं।"
68 वर्षीय जयललिता ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत 16 साल की उम्र में की थी। घर को चलाने के लिए उनकी मां ने उन्हें जबरन फ़िल्मों में उतारा था।
तब जयललिता पढ़कर वकील बनना चाहती थीं। लेकिन एमजीआर के साथ उनकी जोड़ी पसंद किए जाने के बाद उनकी हिट फ़िल्मों की संख्या बढ़ती गई। एमजीआर ने डीएमके से नाता तोड़कर एआईएडीएमके बनाई।
वसंती (जिनकी लिखी जयललिता की जीवनी को प्रकाशित होने से रोक दिया गया था) कहती हैं, "यह पूरी तरह दृढ़ता का काम था। एमजीआर के नज़दीकी सहयोगियों ने सुनिश्चित किया कि जयललिता मंत्री न बन पाएं। इस पर एमजीआर ने उन्हें प्रचार सचिव बना दिया।
इसी वजह से वह लोगों के बीच लोकप्रिय हुईं। उनके करिश्मे से भीड़ खिंचने लगी और एमजीआर जानते थे कि इससे उनकी पार्टी को बढ़ने में मदद मिलेगी। वह बहुत आत्म-निर्भर व्यक्ति हैं। उनकी ख़ास बात है पलटवार करना।"