केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर में न सिर्फ शांति स्थापित की है, बल्कि पूरे देश को भी सुरक्षित करने का काम किया है। असम की सबसे बड़ी समस्या घुसपैठियों की थी, जो नाबालिग बच्चियों से शादी कर सामाजिक संतुलन को बिगाड़ रहे थे। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने इस पर सख्त अभियान चलाया और ऐसे लोगों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने का काम किया।
अब तक 3500 एकड़ चरागाहकी भूमि, 87,000 एकड़ वन्यजीव अभयारण्य की भूमि, 26,000 एकड़ सरकारी भूमि, और 4500 एकड़ अन्य भूमि घुसपैठियों से मुक्त कराई गई है। इसके अतिरिक्त 1548 एकड़ भूमि को भी मुक्त कराया गया है।
अमित शाह ने शुक्रवार को असम के अपने दो दिवसीय दौरे के दूसरे और अंतिम दिन गुवाहाटी, असम में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पंचायत प्रतिनिधि सम्मेलन और असम राजभवन परिसर में ब्रह्मपुत्र विंग के उदघाटन कार्यक्रम को संबोधित किया। शाह ने कहा, असम सरकार ने बच्चियों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ी योजना शुरू की गई है। इसके अंतर्गत लगभग 9,72,940 छात्राओं को अनुदान दिया गया। योजना के तहत ग्रेजुएट छात्राओं को ₹1000 प्रति माह, डबल ग्रेजुएट को 1250 रुपये प्रति माह और स्नातकोत्तर स्तर पर ₹2500 प्रति माह सहायता दी जा रही है।
गृह मंत्री ने आगे कहा कि भाजपा सरकार ने लाखों एकड़ भूमि को घुसपैठियों से मुक्त कराया है। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई इस मुहिम का विरोध कर रहे हैं, लेकिन भाजपा सरकार संकल्पबद्ध है कि असम की एक-एक इंच भूमि को घुसपैठियों से मुक्त कराकर असम के युवाओं को उसका अधिकार दिलाया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कांग्रेस शासनकाल में शंकरदेव और माधवदेव के सत्रों की भूमि पर भी घुसपैठियों ने कब्जा जमा लिया था। भाजपा सरकार ने उस भूमि को भी मुक्त कराकर इन महापुरुषों का सम्मान और सत्रों की पवित्रता को पुनः स्थापित करने का कार्य किया है।
अमित शाह ने असम के हजारों जनप्रतिनिधियों से प्रश्न करते हुए कहा कि जब पहलगाम में हमारे यात्रियों पर हमला हुआ था, तो क्या आपको दुख हुआ था या नहीं? जब निर्दोष यात्री मारे गए, तो क्या आपको गुस्सा आया था या नहीं? पहले के जमाने में ऐसे आतंकी हमले होते थे, हमलावर भाग जाते थे और कुछ नहीं होता था। मोदी सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकवादियों को उनके घर में घुसकर मार गिराने का काम किया और उनके अड्डों को पूरी तरह समाप्त कर दिया। अनेक उतार-चढ़ाव और हिंसक संघर्षों को झेलते हुए आज उत्तर-पूर्व शांति, विकास और समग्र प्रगति की ओर आगे बढ़ रहा है।