वक्फ बिल को लेकर अमित शाह और अखिलेश यादव के बीच तीखी नोकझोंक
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लोकसभा में गुरुवार को वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पर लोकसभा में बोलते हुए समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने गुरुवार को दावा किया कि समुदाय से बाहर का कोई भी व्यक्ति अन्य धार्मिक निकायों का हिस्सा नहीं है।
ये बिल सोची समझी राजनीति के लिए तैयार हो रहा है- अखिलेश
अखिलेश यादव ने कहा कि, यह बिल जो पेश हो रहा है, वो बहुत सोची समझी राजनीति के लिए तैयार हो रहा है। जब चुनाव के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, तो लोगों को नामित क्यों किया जाता है? समुदाय से बाहर का कोई भी व्यक्ति अन्य धार्मिक निकायों का हिस्सा नहीं है। वक्फ निकायों में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने का क्या मतलब है?
अखिलेश ने की अध्यक्ष के अधिकारों के रक्षा की बात
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद भाजपा कुछ कट्टरपंथी समर्थकों को खुश करने के लिए यह विधेयक लाई है। आपके और हमारे अधिकारों में कटौती की जा रही है। अखिलेश ने इस कड़ी में कहा कि- मैंने आपसे कहा कि आप लोकतंत्र के न्यायाधीश हैं। मैंने सुना है कि आपके कुछ अधिकार छीने जा रहे हैं और हमें आपके लिए लड़ना होगा। अध्यक्ष महोदय, मैंने लॉबी में सुना कि आपके कुछ अधिकार भी छीने जा रहे हैं और हमें आपके लिए लड़ना होगा। मैं इस विधेयक का विरोध करता हूं।
अखिलेश यादव के दावे पर बिफरे केंद्रीय गृह मंत्री
वहीं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की शक्तियों में कटौती के अखिलेश यादव के दावे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुस्से में खड़े होकर हस्तक्षेप किया और कहा कि बयान भ्रामक है। गृह मंत्री ने कहा कि, अध्यक्ष के अधिकार विपक्ष के नहीं, बल्कि पूरे सदन के हैं। अखिलेश जी इस तरह की गोलमोल बात आप नहीं कर सकते। आप अध्यक्ष के अधिकारों के रक्षक नहीं हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ने सदस्यों से की अपील
हालांकि इस पूरे बवाल पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अखिलेश यादव से कहा कि उन्हें और सदन के अन्य सदस्यों को अध्यक्ष पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, यह मेरी अपेक्षा है, अध्यक्ष पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए।