सुरक्षा स्थिति का जायजा ले रहे अमित शाह
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जम्मू-कश्मीर में हाल में हुईं आतंकी घटनाओं के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों को आतंकवाद को सख्ती से कुचलने का निर्देश दिया है। साथ ही, आतंकियों के मददगारों के खिलाफ भी कड़ाई बरतने को कहा। शाह ने कहा, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद अंतिम सांसें गिन रहा है, उसके खिलाफ लड़ाई अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। उन्होंने जम्मू में क्षेत्र विशेष और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को लागू करने का निर्देश दिया, ताकि कश्मीर घाटी की तरह आतंक के खिलाफ लड़ाई में सफलता मिल सके।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले गृह मंत्री शाह ने रविवार को जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा हालात पर उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए ये निर्देश दिए। नॉर्थ ब्लॉक में सुबह 11 बजे शुरू हुई बैठक करीब पांच घंटे चली। योग दिवस कार्यक्रम के लिए पीएम मोदी 20 जून को श्रीनगर जाने वाले हैं। बैठक में 29 जून से शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। शाह ने सभी तीर्थस्थलों और पर्यटन स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के निर्देश दिए। यात्रा रूट और राष्ट्रीय राजमार्गों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने को कहा। जम्मू की आतंकी घटनाओं की पृष्ठभूमि में हुई बैठक में शाह ने सभी एजेंसियों को मिशन मोड पर काम करने और समन्वित तरीके से त्वरित जवाबी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर बल दिया। बैठक में एनएसए अजीत डोभाल, एलजी मनोज सिन्हा के अलावा आईबी प्रमुख तपन डेका, चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल मनोज पांडे और सेनाध्यक्ष (नामित) लेफ्टिनेंट जनरल उपेन्द्र द्विवेदी मौजूद थे।
आतंक को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे
अमित शाह ने कहा कि जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई निर्णायक दौर में है। हाल ही में हुई घटनाएं बताती हैं कि आतंकवाद बड़ी और संगठित वारदातों से सिमट कर छद्म लड़ाई तक सीमित होने के लिए मजबूर हो गया है, लेकिन हम इसे भी जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए संकल्पित हैं।
अमरनाथ यात्रा पर पिछले साल 4.28 लाख से ज्यादा तीर्थयात्री आए थे। इस बार आंकड़ा पांच लाख तक जा सकता है। इस बार यात्रा 52 दिन की होगी। सुरक्षा के लिए केंद्रीय सुरक्षाबलों की 500 कंपनियों को तैनात किया जाएगा।