नागरिकता संशोधन विधेयक पर उत्तर-पूर्व राज्यों के सांसदों की आपत्तियों पर विचार विमर्श के लिए गृहमंत्री अमित शाह मैराथन बैठक कर रहे हैं। शुक्रवार को एक दौर की बैठक के बाद शनिवार को शाह ने अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और असम के मुख्यमंत्रियों के साथ इन मसले पर लंबी मंत्रणा की। मुख्यमंत्रियों के अलावा उत्तर-पूर्व राज्यों के छात्र संगठन और सिविल सोसायटी के लोगों के साथ भी बैठकें हुईं।
उत्तर-पूर्व के अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ भी तीन दिसंबर को बैठकों का दौर चलेगा। उत्तर-पूर्व से 12 सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तकनीकि कारणों से कुछ राज्यों को नागरिकता संशोधन विधेयक के दायरे से दूर रखने की सलाह दी थी। इनकी दलील है कि विधेयक के कुछ मौजूदा प्रावधानों की वजह से उत्तर-पूर्व राज्यों में रहने वाले आदिवासी लोगों पर खासा प्रभाव पड़ेगा।
इसके अलावा इनरलाईन परमिट वाले और संविधान की छठी अनुसूचि में आने वाले क्षेत्रों को भी विधेयक के दायरे से दूर रखने की मांग है। गौरतलब है कि असम, त्रिपुरा, मेघालय और मिजोरम छठी अनुसूचि में शामिल राज्य हैं। इनकी दलील है कि विधेयक से इनके ज्यादातर जनसंख्या के संतुलन बिगड़ेगा। असम के लोग इसमें 1985 के असम समझौते का उल्लंघन के नजरिए से भी देख रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक इन बैठकों में इन्हीं तकनीकी पहलुओं का निबटारा किया जाएगा। सरकार इस बिल को इसी सत्र में पेश करना चाह रही है। विधेयक में धार्मिक भेदभाव के कारण बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख, ईसाई और पारसी शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान है।
इसकेअलावा शरणार्थियों को नागरिकता के लिए समय सीमा कम करने की भी योजना है। संसद में तृणमूल और वामदल समेत कई विपक्षी दल इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं। इनका कहना है कि किसी को भी धर्म के आधार पर नागरिकता नहीं दी जा सकती।