जनगणना कार्यालय और SSB भवन के उद्घाटन पर शाह ने कहा कि अनुभवी सिद्ध डेटा हो इसलिए हमने तय किया है कि आने वाली जनगणना, जो कोविड के कारण रुकी हुई है। वह ई-जनगणना यानी इलेक्ट्रॉनिक जनगणना होगी। इसके आधार पर अगले 25 साल के विकास का खाका तैयार होगा।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि देश में अगली जनगणना ई-मोड के जरिये की जाएगी। देश में जनगणना प्रक्रिया के डिजिटल होने से अगली जनगणना के दौरान सौ फीसदी सटीक गणना की उम्मीद की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इसके आधार पर अगले 25 साल के लिए देश के विकास की योजनाएं बनाई जाएंगी। शाह ने कहा कि जनगणना कई मायनों में अहम है। असम जैसे राज्य के लिए यह और भी महत्वपूर्ण है जो आबादी के लिहाज से संवेदनशील है।
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इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री के साथ असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को तामुलपुर में भूमि पूजन किया। इस दौरान बीएसएफ के केंद्रीय स्टोर और कार्यशाला के उद्घाटन और खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों के शुभारंभ में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के टर्नओवर में 248% की वृद्धि हुई है और कुल टर्नओवर 1 लाख करोड़ रुपए के पार हो गया है। खादी ग्राम उद्योग आयोग अगर 1 लाख करोड़ का टर्नओवर करता है तो देश के करोड़ों लोगों को रोजगार मिलता है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए प्रयासरत है। असम के दो दिवसीय दौरे पर आए शाह ने मनकाचर सेक्टर में असम-बांग्लादेश सीमा पर स्थिति की समीक्षा की और यहां एक गोपनीय बैठक में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अभियान संबंधी रणनीतियों पर चर्चा की।
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गृह मंत्री ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास की कमी की वजह से लोगों का विस्थापन हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन क्षेत्रों में विकास के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात बीएसएफ कर्मियों को सुरक्षा मजबूत करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक मुहैया कराई जाएंगी।
इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री ने अमिनगांव में जनगणना कार्यालय का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि नीति निर्माण में जनगणना की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। केवल जनगणना ही बता सकती है कि विकास, एससी और एसटी की स्थिति क्या है और पहाड़ों, शहरों और गांवों में लोगों की जीवनशैली कैसी है?
जनगणना कार्यालय और SSB भवन के उद्घाटन पर शाह ने कहा कि अनुभवी सिद्ध डेटा हो इसलिए हमने तय किया है कि आने वाली जनगणना, जो कोविड के कारण रुकी हुई है। वह ई-जनगणना यानी इलेक्ट्रॉनिक जनगणना होगी। इसके आधार पर अगले 25 साल के विकास का खाका तैयार होगा।