पूरे रेड की निगरानी खुद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल कर रहे थे। इसके लिए 250 से ज्यादा पुलिस अफसर लगाए गए थे। ऑपरेशन में एक एडीजी, चार आईजी, 16 एसपी रैंक के ऑफिसरों को शामिल किया गया था। पूरा ऑपरेशन इतना सीक्रेट था कि PFI ही क्या, ऑपरेशन को अंजाम देने वाले अफसरों के अलावा पुलिस या प्रशासनिक अफसरों को भी इसकी भनक नहीं लग पाई।
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी PFI के देशभर में स्थित ठिकानों पर गुरुवार को रेड हुई। 15 राज्यों के 150 से ज्यादा ठिकानों पर NIA और ED ने एकसाथ छापेमारी की। इसमें 106 से ज्यादा PFI कार्यकर्ताओं और नेताओं की गिरफ्तारी हुई। PFI के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओएमए सलाम, दिल्ली प्रमुख परवेज अहमद भी पकड़े गए।
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पूरे रेड की निगरानी खुद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल कर रहे थे। इसके लिए 250 से ज्यादा पुलिस अफसर लगाए गए थे। ऑपरेशन में एक एडीजी, चार आईजी, 16 एसपी रैंक के ऑफिसरों को शामिल किया गया था। पूरा ऑपरेशन इतना सीक्रेट था कि PFI ही क्या, ऑपरेशन को अंजाम देने वाले अफसरों के अलावा पुलिस या प्रशासनिक अफसरों को भी इसकी भनक नहीं लग पाई।
ऐसे में आज हम इस सीक्रेट ऑपरेशन की पूरी कहानी बताएंगे। कैसे इसकी शुरुआत हुई और कैसे पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। आइए जानते हैं...
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और एनएसए अजीत डोभाल।
- फोटो : सोशल मीडिया
शुरुआत कैसे हुई?
दरअसल पिछले दो साल में देशभर के अलग-अलग राज्यों में कई मजहबी हिंसा की घटनाएं हुईं। ज्यादातर साजिश के तार पीएफआई से जुड़े। दिल्ली और फिर इस साल भाजपा प्रवक्ता रहीं नुपुर शर्मा के बयान के बाद जून-जुलाई में हुए देश के अलग-अलग शहरों में हुई हिंसा की कड़ी भी पीएफआई से ही जुड़ी थी। पीएफआई पर हिंसा की प्लानिंग और फंडिंग का आरोप लगा।
इसी महीने आठ सितंबर को NIA ने बिहार के कई जिलों में एक साथ छापा मारा था। NIA की टीम ने अररिया, छपरा, नालंदा में कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। दस दौरान पटना में फुलवारी शरीफ टेरर मॉड्यूल सामने आया था। इनका लिंक भी PFI से जुड़ा था।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बार-बार दंगों और हिंसा में PFI का नाम आने के बाद सरकार ने कार्रवाई की तैयारी की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से बातचीत के बाद कार्रवाई के लिए की मंजूरी थी। NSA अजीत डोभाल ने अपने टॉप अफसरों के साथ इसकी पूरी योजना तैयार की।
पीएफआई का स्टेट ऑफिस
- फोटो : सोशल मीडिया
मोदी से हरी झंडी मिलने के बाद शुरू हुआ काम
पीएमओ से जुड़े सूत्र कहते हैं कि अगस्त के आखिरी हफ्ते में गृहमंत्री अमित शाह और NSA अजीत डोभाल ने पूरी प्लानिंग तैयार कर पीएम नरेंद्र मोदी को दिखाई। उन्हें बताया गया कि इस पूरे ऑपरेशन को कैसे अंजाम दिया जाएगा। पीएम से हरी झंडी मिलने के बाद अजीत डोभाल ने काम शुरू कर दिया। दो सितंबर को अजीत डोभाल पीएम मोदी के साथ खुद केरल पहुंचे थे।
यहां कोच्चि में पीएम मोदी ने आईएनएस विक्रांत को भारतीय नौसेना में शामिल क्या था। इस दौरान NSA डोभाल भी उनके साथ ही मौजूद थे। बताया जाता है कि कार्यक्रम खत्म होते ही पीएम मोदी दिल्ली के लिए रवाना हो गए, लेकिन अजीत डोभाल ने इसी बीच केरल के टॉप पुलिस अफसरों के साथ बैठक की। इसके बाद डोभाल मुंबई पहुंचे। यहां भी उन्होंने राजभवन के सुरक्षा अधिकारियों के साथ मीटिंग की। महाराष्ट्र के टॉप पुलिस अधिकारियों से भी बात की।
देशभर से पीएफआई के कई सदस्य गिरफ्तार किए गए।
- फोटो : सोशल मीडिया
फिर आई एक्शन वाली रात
अजीत डोभाल ने इस पूरे ऑपरेशन को सीक्रेट रखा था। डेट और समय की जानकारी सिर्फ डोभाल, गृह सचिव, गृहमंत्री शाह और पीएम नरेंद्र मोदी को ही थी। डोभाल ने 15 सितंबर को NIA और ED के अफसरों के साथ बैठक की और उन्हें पूरी योजना की जानकारी दी। दोनों संस्थानों के टॉप और तेज तर्रार अफसरों की सूची बनी। सबको अलग-अलग राज्य और अलग-अलग शहरों की जानकारी दी गई। जहां, जरूरत थी, वहां के लिए एयरक्राफ्ट का इंतजाम कराया गया। ताकि, जरूरत पड़ने पर तुरंत संदिग्धों को गिरफ्तार कर दूसरे स्थान पर लाया जा सके। इसके लिए एयरफोर्स और एयरपोर्ट अथॉरिटी से भी बात हुई।
फिर आई एक्शन वाली रात यानी 21 सितंबर 2022। दिन में ही NIA और ED के अफसर छापेमारी के लिए तय जिलों में पहुंच चुके थे। सारी टीमें तैयार थीं। छापेमारी से एक घंटे पहले स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी दी गई और बैकअप फोर्स तैयार करवाई गई। इसके बाद रात एक बजे NSA अजीत डोभाल ने एकसाथ सभी जिलों में PFI के ठिकानों पर छापेमारी का आदेश दिया। इसकी प्लानिंग इतनी मजबूत थी कि कहीं भी किसी को गोली चलाने तक का मौका नहीं मिला। रात में जब ये छापेमारी हुई तब ज्यादातर PFI सदस्य सो रहे थे।
कर्नाटक में पीएफआई पर छापेमारी का मुसलमान युवकों ने विरोध किया।
- फोटो : सोशल मीडिया
छापेमारी में क्या-क्या मिला?
NIA ने 15 राज्यों में 150 से ज्यादा PFI के ठिकानों पर छापेमारी की। अधिकारियों के अनुसार PFI के खिलाफ ये अब तक का सबसे बड़ा अभियान है। छापेमारी के दौरान केरल में PFI के सबसे अधिक 22 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। इसमें PFI के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओएमए सलाम भी शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि सबसे अधिक गिरफ्तारी केरल के बाद महाराष्ट्र से 20, कर्नाटक से 20, तमिलनाडु से 10, असम से नौ, उत्तर प्रदेश से आठ, आंध्र प्रदेश से पांच, मध्य प्रदेश से चार, पुडुचेरी से तीन, दिल्ली से तीन और राजस्थान से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। पूरे देश में गिरफ्तारियों का आंकड़ा देखें तो ये 106 पहुंच जाता है। छापेमारी के दौरान NIA ने PFI के ठिकानों से 200 से ज्यादा मोबाइल, 50 से ज्यादा लैपटॉप व अन्य कई तरह के दस्तावेज जब्त किए हैं।
पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह
- फोटो : अमर उजाला
फिर शाह ने लिया जायजा
NIA और ED की पूरी कार्रवाई के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने गुरुवार को ही एक हाईलेवल बैठक की। इसमें गृह सचिव, एनएसए अजीत डोभाल समेत कई अफसर थे। इसमें फिर से पूरी कार्रवाई का रिपोर्ट कार्ड अजीत डोभाल ने पेश की। बताया कि छापेमारी में अब तक क्या-क्या हासिल हुआ है और कैसे इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। आगे क्या कदम उठाए जाएंगे इसको लेकर भी बात हुई।