भारत में मौतों और दिव्यांगता की प्रमुख वजहों में शामिल स्ट्रोक पर अमेरिकी हार्ट एसोसिएशन ने सलाह दी है कि भले ही इसके लक्षण एक घंटे में खत्म हो जाएं, लेकिन पूरी जांच जरूर करवाएं। एक घंटे में लक्षण खत्म होने वाले स्ट्रोक ट्रांजियंट इस्केमिक अटैक (टीआईए) कहलाते हैं।
इससे मरीज को नुकसान नहीं होता, लेकिन अगले तीन महीने में हर पांच में से एक पीड़ित को जानलेवा स्ट्रोक आ सकता है। आधे मामलों में तो बड़े स्ट्रोक अगले दो दिन में ही आ जाते हैं। अमेरिकी हार्ट एसोसिएशन ने अपने जर्नल स्ट्रोक में लेख से आगाह किया कि टीआईए के मामलों में पूरी जांच जरूरी है। हालांकि, यह माना कि सभी जगह न्यूरोलॉजिस्ट न होने और जरूरी संसाधन वाले अस्पतालों या चिकित्सा केंद्रों की कमी से इन संदिग्ध मामलों की जांच कई बार नहीं हो रही है। लेख में सलाह दी गई है कि अस्पताल पहुंचे मरीज को देख रहे डॉक्टर अपने पास जांच के लिए जरूरी संसाधन न होने पर उसे तत्काल न्यूरोलॉजिस्ट को रेफर करें। जहां तक संभव हो, चुनौतीपूर्ण लेकिन जरूरी मूल्यांकन करें और इलाज पर आगे निर्णय लें।
रुक जाती है मस्तिष्क को रक्त पहुंचाने की प्रक्रिया टीआईए में मस्तिष्क को रक्त पहुंचाने की प्रक्रिया कुछ समय के लिए रुक जाती है, लेकिन फिर खुद ही ठीक हो जाती है। दिमाग को नुकसान नहीं होता। इसे मिनी स्ट्रोक भी कहते हैं।
ये हैं लक्षण टीआईए के लक्षण स्ट्रोक जैसे होते हैं। इतना ही फर्क है कि यह अस्थायी होते हैं। इनमें चेहरे का लटकना, शरीर के एक तरफ कमजोरी या असंवेदनशीलता महसूस होना, बोलने के लिए सही शब्द न मिलना या साफ न बोल पाना, चक्कर आना, देखने में परेशानी होना, चलना मुश्किल लगना शामिल हैं।
ऐसे करें बचाव
कनेक्टिकट स्थित येल न्यू हेवर अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट और एसोसिएशन का बयान जारी करने वाली समिति के अध्यक्ष डॉ. हार्दिक अमीन ने बताया कि सामान्य नजर आ रहे मरीज की भी जांच जरूरी है। इसलिए तत्काल एंबुलेंस बुलाएं या मरीज को अस्पताल पहुंचाएं।
ऐसे पहचानें टीआईए
टीआईए के साथ मरीज ‘नकली टीआईए’ से भी ग्रस्त हो सकते हैं। इसमें समान लक्षण होते हैं, लेकिन कम ब्लड प्रेशर, मिर्गी या सिरदर्द भी इसकी वजह हो सकता है।
कौन हैं खतरे में
टीआईए का खतरा उन्हें ज्यादा है जो हृदय व रक्त वाहिकाओं संबंधित बीमारियों से ग्रस्त हैं। इनमें उच्च रक्तचाप व मधुमेह प्रमुख हैं। स्लीप ऐप्नीया, हृदय धमनियों के रोग से पीड़ित भी खतरे में हैं। मोटापे, सिगरेट पीने और रक्त में कोलेस्ट्रॉल अधिक होने पर खतरा बढ़ता है। जो पहले भी स्ट्रोक से पीड़ित हो चुके हैं, उन्हें भी जोखिम है।