करीब 4 दशकों से परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह यानी एनएसजी बिरादरी से अलग भारत के लिए इस बार समूह में शामिल होना लगभग तय है। पीएम नरेंद्र मोदी देश को एनएसजी की सदस्यता दिलाने के लिए जितनी जोर-आजमाइश से लगे हैं, भारत के समर्थन में अमेरिका की कोशिशें भी उतनी तेजी से जोर पकड़ती जा रही हैं। लगातार समूह के 48 देशों पर भारत के पक्ष में दबाव बना रहे अमेरिका ने फिर एनएसजी देशों को भारत का समर्थन करने को कहा है।
हफ्ते भर पहले ही अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने एनएसजी देशों को पत्र लिखा था की भारत की सदस्यता के लिए आमराय बनाएं। अब यूएस स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता जॉन किरबी ने पत्रकारों से कहा है कि हफ्ते भर बाद एनएसजी प्लेनरी में आवेदनों पर विचार किया जाएगा, अमेरिका ने सभी देशों से भारत का समर्थन करने के लिए कहा है।
एक सवाल के जवाब में किरबी ने पत्रकारों से कहा कि हमनें सभी देशों से साफ कर दिया है कि भारत के आवेदन पर गौर होना चाहिए।
उधर नामीबिया भी भारत को सशर्त समर्थन करने के लिए तैयार हो गया है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी नामीबिया की यात्रा पर हैं, इस मौके पर वहां राष्ट्रपति हेज गेनगोब ने कहा कि नामीबिया के पास खुद के परमाणु हथियार तो है नहीं, लेकिन उसके पास भरपूर परमाणु ईंधन है। नामीबिया चाहता है कि भारत परमाणु ईधन का गलत इस्तेमाल न करे तो वह सहयोग करने के लिए तैयार है।
पाकिस्तान, चीन, तुर्की, ऑस्ट्रिया और दक्षिण अफ्रीका को छोड़ दें तो लगभग सभी देश भारत की एनएसजी में सदस्यता को लेकर एकमत दिख रहे हैं।