अमेरिकी सरकार ने आठ देशों से आने वाले विमानों में यात्रियों पर लैपटॉप, आईपैड, कैमरे और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान साथ लाने पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी है। लेकिन इस फैसले से केवल वहीं आठ देशों के यात्री प्रभावित नहीं होंगे बल्कि इसका असर भारतीयों पर भी पड़ेगा। शनिवार से उन भारतीय यात्रियों को भी दिक्कतें का सामना करना पड़ेगा, जिनकी फ्लाइट घाटी देशों जैसे-दुबई, अबूधाबी, दोहा से होकर गुजरती है। वैसे भी, अमेरिका जानेवाले हर दो में से एक भारतीय घाटी देशों से होकर ही जाते हैं।
अब ऐसे भारतीय भी अमेरिका के नए गैजेट बैन के दायरे में आएंगे। इन भारतीयों को अपने गैजेट्स को चेक-इन कराना होगा, ऐसे में उनके खोने, बदलने या चोरी होने की आशंका बढ़ जाएगी। गौरतलब है कि अमेरिका आ रहे मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से आ रहे विमानों में यात्री लैपटॉप, आईपैड, कैमरा और कई अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान नहीं ला सकेंगे।
अगर किसी यात्री ने मुंबई-दुबई-डलास फ्लाइट में टिकट बुक कराया है तो उसे मुंबई में ही अपने लैपटॉप और दूसरे गैजेट्स को चेक-इन कराना पड़ेगा। हालांकि एअर इंडिया के यात्रियों पर यह गैजेट बैन लागू नहीं होगा। लेकिन जेट एयरवेज के उन यात्रियों पर गैजेट बैन लागू होगा जिनकी फ्लाइट ऊपर बताए गए किसी भी एयरपोर्ट से ट्रांजिट हो रही हो। भारत से अमेरिका जाने वाले यात्रियों के लिए दुबई, अबु धाबी और दोहा के एयरपोर्ट काफी लोकप्रिय ट्रांजिट पॉइंट हैं। इस तरह ट्रंप प्रशासन के गैजेट बैन की भारतीयों पर भी बड़ी मार पड़ने वाली है।
सीएपीए के कपिल कौल ने कहा कि अमेरिकी सरकार के इस फैसले से कारोबारी वर्ग प्रभावित होगा। हालांकि उन्होंने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि ये फैसला कुछ समय के लिए ही लागू रहेगा। ट्रैवल एजेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अनिल पंजाबी ने कहा कि अमेरिका और उसके बाद ब्रिटेन ने इस तरह के प्रतिबंध लगाकर यात्रियों को डरा दिया है। उन्होंने कहा कि खुफिया एजेंसियों का मानना है कि खाड़ी देशों से होकर निकलनेवाली फ्लाइलों में आतंकवादी संगठन बम रख सकते हैं।