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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावः इन 5 कारणों ने पक्की कर दी डोनाल्ड ट्रंप की जीत

Wed, 09 Nov 2016 12:36 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : Getty Images
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अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव में अभी तक के सबसे कड़े संघर्ष के बाद परिणामों की घोषणा हो चुकी है, रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को पछाड़कर अमेरिका के सबसे ताकतवर शख्स की कुर्सी तक पहुंचने में सफलता हासिल कर ली है।
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अमेरिकी लोकतंत्र के 240 साल के इतिहास में इसे अभी तक का सबसे कड़ा मुकाबला माना जा रहा था जहां अंत तक भी किसी की जीत की एकतरफा भविष्यवाणी करना मुश्किल लग रहा था। लेकिन अंत में डोनाल्ड ट्रंप तमाम शंका-आशंकाओं को धता बताते हुए विजेता के रूप में उभरे। ट्रंप की यह जीत कई मायनों में चौंकाने वाली भी है, महिलाओं के खिलाफ अश्लील टिप्पणी के टेप सावर्जनिक होने और मुस्लिमों पर नस्लभेदी बयानों के कारण वह लगातार विवादों में घिरे हुए थे।

ऐसे में उनकी जीत हर किसी के लिए किसी के लिए चौंकाने वाली है। आइए डालते हैं ऐसे पांच कारणों पर निगाह जिन्होंने जुदा माहौल में भी ट्रंप की जीत की राह आसान कर दी।
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एंटी इनकंबेंसी

- फोटो : Getty Images
अमेरिका में आठ साल पहले जार्ज बुश के खिलाफ जिस सत्ता विरोधी लहर पर सवार होकर बराक ओबामा राष्ट्रपति की कुर्सी तक पहुंचे थे उसका असर मौजूदा चुनाव में भी दिखाई दिया। जब ओबामा के लगातार आठ साल के शासन से उबे लोगों ने नई उम्‍मीद के साथ डोनाल्ड ट्रंप का रुख किया।

अपने मुखर अंदाज और बेलौस बातों से ट्रंप ने भी लोगों को ओबामा प्रशासन की ढुलमुल पड़ चुकी नीतियों के खिलाफ खड़ा कर दिया। हालांकि ओबामा के खिलाफ आम जनता में कोई भारी नाराजगी तो नहीं देखी गई लेकिन आठ साल के लगातार शासन से सत्ता विरोधी लहर तो तैयार हो ही गई। वैसे भी 90 के बाद से कोई भी पार्टी लगातार तीसरी बार सत्ता में नहीं आई। इस बार भी यह परिपाटी बनी रही। 

आतंकवाद के प्रति कड़ा रुख
यूं तो अमेरिकी जनता को काफी उदार और सुधारवादी माना जाता है लेकिन पिछले कुछ समय से आतंकवाद जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर अमेरिकी लोगों में मुखरता बढ़ी है। इसी मुखरता को भुनाया डोनाल्ड ट्रंप ने। जिनका मुखर और बेलौस अंदाज लोगों को काफी पसंद आया।

खासकर मुस्लिम आतंकवाद जैसे मुद्दों पर अपने कड़े रुख से उन्होंने आम अमेरिकी जनता को अपने पक्ष में खड़ा करने में सफलता हासिल की। हालांकि इस मुद्दे पर उन्हें काफी आलोचना का सामना भी करना पड़ा लेकिन इससे बेपरवाह होकर वह अपने रुख पर कायम रहे। यहां तक की वह पाकिस्तान को इस मुद्दे पर धमकी देने से भी पीछे नहीं हटे।

बेलौस अंदाज

डोनाल्ड ट्रंप की सबसे बड़ी कमजोरी ही उनकी सबसे बड़ी खासियत बन गई। हर समय मुखर अंदाज में रहने वाले डोनाल्ड ट्रंप बेलौस होकर अपनी बात रखते हैं। किसी भी मुद्दे पर बोलते समय वह परिणाम की कभी परवाह नहीं करते चाहे वह आतंकवाद का मुद्दा हो गया राष्ट्रीय सुरक्षा का।

इसकी वजह से अमेरिकी जनता में उनकी छवि एक ऐसे नेता की बन गई जो मजबूती से अपनी बात रखता है और फिर उसे पीछे उतनी ही मजबूती से डटा रहता है। यही कारण है ‌कि तमाम विवादित बयान देने के बाद भी ट्रंप एक बार भी उनसे पीछे नहीं हटे। चाहे वह मुस्लिम आतंकवाद पर दिया गया उनका विवादित बयान हो गया हिलेरी क्लिंटन पर किए गए निजी हमले।

चीन के प्रति कड़ा रुख
दुनिया में अमेरिका के बाद चीन दूसरी बड़ी ताकत बनता जा रहा है जिसको लेकर अमेरिकी नागरिकों में एक भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। ट्रंप ने इसे बखूबी पहचाना और हर मुद्दे पर भुनाया। अपने भाषणों में वह यह कहते भी दिखे कि अगर वह राष्ट्रपति बनते हैं तो वह चीन को कड़ा सबक सिखाएंगे। एक भाषण में तो उन्होंने यह भी कह दिया था कि चीन अमेरिकी अर्थव्यवस्‍था का रेप कर रहा है। ऐसे में चीन के प्रति कड़े रुख ने भी ट्रंप को आम मतदाताओं का चहेता बना दिया। 
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नौकरियों के मुद्दे पर ओबामा और हिलेरी पर निशाना 

अमेरिका में बड़ी संख्या में युवा फिलहाल बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं। ट्रंप ने इसके लिए सत्तारूढ़ ओबामा सरकार और हिलेरी क्लिंटन को निशाने पर रखा। युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी के लिए ट्रंप ने ओबामा और उनकी सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

ट्रंप ने युवाओं से वादा किया ‌कि वो राष्ट्रपति चुने जाते हैं तो वह ऐसी व्यवस्‍था करेंगे जिससे अमेरिकी युवाओं की नौकरियां चीन और भारत से आने वाले लोग न छीन सकें। उनका यह दांव काम कर गया। इसके अलावा अमेरिका की आबादी में महत्वपूर्ण स्‍थान रखने वाले प्रवासियों पर भी ट्रंप ने खुलकर डोरे डाले।
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