एंबुलेंस के लिए कोई मानक न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने एतराज जताया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी भी वाहन पर एंबुलेंस लिखने से वह एंबुलेंस नहीं हो जाता। चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा एंबुलेंस के लिए कोई न कोई मानक तो होना ही चाहिए, लेकिन यहां तो मानक ही नहीं है।
पीठ ने कहा कि किसी भी वाहन को पेंट कर उसे एंबुलेंस नहीं बनाया जा सकता। एंबुलेंस के लिए कुछ शर्तें निर्धारित होनी चाहिए। पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि वह एंबुलेंस के लिए समान मानक तय करे।
सुनवाई के दौरान पीठ को जानकारी दी गई कि एम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में एंबुलेंस के लिए मापदंड निर्धारित की थी। जैसे एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर हो, मरीजों के लिए अलग कंपारटमेंट, फर्स्ट एड बॉक्स आदि की व्यवस्था हो।
इस पर पीठ ने सरकार से पूछा कि आपके पास इस लेकर विशेषज्ञों की रिपोर्ट है तो इसे ठंडे बस्ते में क्यों डाला है। पीठ ने केंद्र सरकार को चार हफ्ते में इस संबंध में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
110 डीजल एंबुलेंस के पंजीकरण की इजाजत
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को 110 डीजल एंबुलेंस के पंजीकरण की इजाजत दे दी है। सरकार ने ट्रॉमा सेंटर के लिए एंबुलेंस की दरकार थी। इन एंबुलेंस के पंजीकरण के लिए ग्रीन टैक्स भी नहीं लगेगा। मालूम हो कि गत 16 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर में 2000 सीसी से अधिक ईंजन क्षमता वाले डीजल वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगा दी थी।