जम्मू-कश्मीर में शुक्रवार को अमरनाथ यात्रा के दौरान एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई है। लगभग साठ लोगों को गंभीर चोट लगी है, जबकि इतने ही श्रद्धालु अभी लापता हैं। सुरक्षा एजेंसियों के विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि पवित्र अमरनाथ गुफा के निकट बादल फटना कोई नई बात नहीं है। पिछले साल 28 जुलाई को भी इसी जगह पर बादल फटा था। पानी का सैलाब आ गया था। हालांकि उस वक्त कोरोना के चलते अमरनाथा यात्रा नहीं हो रही थी, इसलिए जान-माल का ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। अब दो साल के अंतराल के बाद जब यात्रा शुरू हुई तो वैसी ही घटना हो गई। मतलब, जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने जुलाई 2021 से कोई सबक नहीं लिया। उसी जगह पर श्रद्धालुओं के लिए टैंट तान दिए गए, जहां पर बादल फटने के बाद पानी का सैलाब आता है।
सुरक्षा एजेंसियों के सूत्र कहते हैं, इस बार तो जम्मू-कश्मीर का मौसम भी कुछ ऐसी आपदा का संकेत दे रहा था। लेह और करगिल में इस बार जैसी गर्मी साल महसूस की गई, वैसी पहले कम ही देखने को मिलती है। चूंकि हमारा काम तो सुरक्षा का है, इसलिए हमने उसे पुख्ता बनाए रखा है। अभी तक यात्रा के दौरान कोई भी आतंकी हमला या उनकी कोई दूसरी शरारत देखने को नहीं मिली। आर्मी, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ, एसएसबी और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान यात्रा रूट पर तैनात हैं। सीआरपीएफ डीजी कुलदीप सिंह, शनिवार को अमरनाथ यात्रा के रूट पर पड़ने वाले बेस कैंप 'बालटाल' पर पहुंचे हैं। उन्होंने अमरनाथ गुफा के निकट बादल फटने से हुए नुकसान और राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया है।