भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय समिति के समक्ष ट्विटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और शीर्ष अधिकारियों के पेश होने से इनकार करने पर शनिवार को इस सोशल नेटवर्क कंपनी को ‘नतीजे’ की चेतावनी दी और कहा कि किसी भी एजेंसी को देश की संस्थाओं का निरादर करने का हक नहीं है। संसदीय समिति ने सोशल मीडिया मंचों पर नागरिकों के अधिकारों को सुरक्षा प्रदान करने के मुद्दे पर ट्विटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और अन्य अधिकारियों को बुलाया था।
भाजपा प्रवक्ता एवं नयी दिल्ली की सांसद मीनाक्षी लेखी ने संवाददाताओं से कहा, किसी भी देश में, किसी भी एजेंसी को उस देश की संस्थाओं का निरादर करने का हक नहीं है। ऐसे में, यदि ट्विटर स्थापित संस्था संसद का निरादार कर रहा है तो उसके नतीजे होंगे। उन्होंने कहा, नतीजे होंगे क्योंकि किसी भी लोकतांत्रिक देश की संस्थाओं का वैश्विक शक्तियों द्वारा सम्मान करने की जरुरत है। यदि किसी प्रकार का उल्लंघन होता है तो उन उल्लंघनों के नतीजे होते हैं। संस्थाओं का सम्मान करने की जरूरत है।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या संसदीय समिति के सामने पेश न होने पर ट्विटर को भारत सरकार द्वारा बैन कर देना चाहिए?
पोल के जवाब में हमें कुल 2738 वोट मिले। इनमें 79.25 फीसदी (2170 वोट) पाठकों ने माना कि संसदीय समिति के सामने पेश न होने पर ट्विटर को भारत सरकार द्वारा बैन कर देना चाहिए, जबकि 20.75 फीसदी (568 वोट) पाठकों ने माना कि संसदीय समिति के सामने पेश न होने पर ट्विटर को भारत सरकार द्वारा बैन नहीं करना चाहिए।